इंदौर। नेमी नगर जैन कॉलोनी में दशलक्षण महापर्व का शुभारंभ आध्यात्मिक ऊर्जा, साधना और जिनवाणी के स्वाध्याय के साथ हुआ। इस पावन अवसर पर आचार्य श्री 108 सुनीलसागरजी महाराज के सान्निध्य में दशलक्षण महापर्व के प्रथम दिवस उत्तम क्षमा धर्म की पावन मंगल बेला में गुरुदेव द्वारा अझझ्प जोगं योग का आयोजन हुआ। प्रातःकालीन मंगल बेला में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ अझझ्प जोगं में सहभागिता की। गुरुदेव के मंगल सान्निध्य में संपन्न इस आध्यात्मिक आयोजन से वातावरण भक्तिमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा। आयोजित सन्मति साधना शिविर में हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ लिया। प्रथम दिवस उत्तम क्षमा धर्म को समर्पित रहा। मंगल प्रवचन में आचार्य श्री ने क्षमा के महत्व को आत्मशुद्धि का आधार बताते हुए कहा कि क्षमा केवल किसी से माफी मांगना या किसी को माफ कर देना नहीं, बल्कि मन में उत्पन्न क्रोध, द्वेष और वैरभाव को समाप्त कर आत्मा को निर्मल बनाने की साधना है। उत्तम क्षमा हमें परिस्थितियों और व्यक्तियों के प्रति प्रतिक्रिया देने के बजाय संयम, शांति और समता का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देती है। क्षमा का भाव जितना गहरा होता है, मन उतना ही हल्का और आत्मा उतनी ही शांत होती है। इसके पश्चात हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता में दशलक्षण महापर्व की पूजन-विधान संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने भक्ति एवं श्रद्धा के साथ भगवान जिनेंद्र की आराधना करते हुए उत्तम क्षमा धर्म का स्मरण किया।

आर्यिका श्री संपूर्णमति माताजी ने करवाया भावालोयणा का स्वाध्याय

दिवाकाल में आर्यिका श्री संपूर्णमति माताजी द्वारा भावालोयणा का स्वाध्याय कराया गया, जिसमें साधकों को अपने भीतर झांककर आत्मनिरीक्षण, आत्मसुधार और अपने भावों की शुद्धि की प्रेरणा मिली। वहीं सिद्धार्थसागरजी द्वारा तत्त्वार्थ सूत्र का स्वाध्याय कराया गया। हजारों शिविरार्थियों ने एकाग्रता एवं श्रद्धा के साथ जिनवाणी का श्रवण और अध्ययन किया। संध्याकालीन बेला में शंका-समाधान का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।

प्रथम दिवस क्षमा, आत्मचिंतन, स्वाध्याय को समर्पित

गुरुदेव की मंगलमय आरती हुई। आरती के पश्चात विभिन्न आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस प्रकार दशलक्षण महापर्व का प्रथम दिवस क्षमा, आत्मचिंतन, स्वाध्याय, साधना और भक्ति के भावों से ओतप्रोत रहा। सन्मति साधना शिविर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक उत्सव का स्वरूप प्रदान किया।