जयपुर। जनकपुरी-ज्योतिनगर स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में चल रहे दशलक्षण महापर्व 2026 के अंतर्गत शनिवार को जैन पाठशाला के विद्यार्थियों द्वारा ज्ञानवर्धक एवं मनोरंजक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। पाठशाला के मुख्य संयोजक पदम जैन बिलाला ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ पाठशाला के संरक्षकों ने दीप प्रज्वलन के साथ किया। इसके बाद बालकों ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में छोटे बच्चों की प्रस्तुत लघु नाटिका ‘गतियों का यू-टर्न’ विशेष आकर्षण का केंद्र रही। नाटिका के माध्यम से विद्यार्थियों ने जैन दर्शन में वर्णित चार गतियों मनुष्य, देव, तिर्यंच एवं नारकी गति को सरल, रोचक एवं हास्यपूर्ण ढंग से समझाया। बच्चों की प्रभावी प्रस्तुति ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसका सदुपयोग आत्मकल्याण के लिए किया जाना चाहिए।

सभी कलाकार विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया

इसके बाद द्वादश वर्षीय विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत चौपाल में आहार का मेन्यू कार्ड ने कार्यक्रम को विशेष ज्ञानवर्धक बना दिया। विद्यार्थियों ने संवाद एवं रोचक प्रस्तुति के माध्यम से संतों के आहार की मर्यादाएं वस्तुओं की मर्यादा, पड़गाहन, सोला (द्रव्य, क्षेत्र, काल एवं भाव के नियम) तथा नवधा भक्ति के विषय को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया। प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों ने बताया कि साधु-संतों को आहार कराने में शास्त्रोक्त मर्यादाओं एवं नियमों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। पाठशाला के संयोजक राजेन्द्र ठोलिया एवं ताराचंद गोधा ने बताया कि विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों से संबंधित 10 प्रश्न दर्शकों से पूछे गए। सही उत्तर देने वाले प्रतिभागियों के साथ-साथ कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी कलाकार विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम के दौरान मंदिर समिति के पदाधिकारी, पाठशाला के शिक्षक-शिक्षिकाएँ, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों को सभी ने सराहा तथा उनका उत्साहवर्धन किया।