सिहोनियां/अंबाह। अतिशय क्षेत्र सिहोनियां में 28 सितंबर को आयोजित वार्षिक मेला महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। भगवान शांतिनाथ, कुंथुनाथ एवं अरहनाथ के जिनबिंबों का 1008 कलशों से महामस्तकाभिषेक आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा। मंगल मंत्रोच्चार, स्तवन, भजन और जिनेंद्र भगवान के जयकारों से जिनालय परिसर गुंजायमान रहा।

प्रातः से जुटे श्रद्धालु

प्रातःकाल से ही श्रद्धालु परिवार सहित सिहोनियां पहुंचने लगे। दर्शन, पूजन, अभिषेक और सामूहिक धार्मिक अनुष्ठानों में सभी ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। बच्चों एवं युवाओं में भी आयोजन को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया।

श्रद्धालुओं ने विनय और भक्तिभाव के साथ कलश धारण कर जिनेंद्र भगवान का अभिषेक किया। जिनेश जैन ने बताया कि जैन दर्शन में अभिषेक आत्मशुद्धि और वीतराग भाव की साधना का प्रतीक है। तीर्थंकरों के गुणों का स्मरण जीवन में अहिंसा, संयम, त्याग, तप, क्षमा और करुणा अपनाने की प्रेरणा देता है।

सर्वजीव कल्याण की भावना से शांतिधारा

महामस्तकाभिषेक के साथ विश्व शांति, सर्वजीव कल्याण और सर्वमंगल की भावना से शांतिधारा की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान के समक्ष सुख, शांति, सद्भाव और मैत्री की मंगलकामना की। शांतिधारा के दौरान मंत्रोच्चार और स्तवनों से जिनालय का वातावरण भक्तिमय रहा।

सानिध्यमति माताजी ने दिया आत्मशुद्धि का संदेश

परम पूज्य गणिनी आर्यिका रत्न 105 श्री संगममति माताजी की शिष्या सानिध्यमति माताजी ने मंगल प्रवचन में कहा कि धर्म को केवल पूजा, अभिषेक और आयोजनों तक सीमित न रखकर जीवन के आचरण में उतारना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जिनेंद्र भगवान का अभिषेक करते समय साधक को अपने अंतर्मन का भी अभिषेक करना चाहिए। मन के विकारों को दूर करना, वाणी में मधुरता लाना और कर्मों में पवित्रता रखना आत्मशुद्धि की दिशा में सार्थक प्रयास है। उन्होंने क्रोध, मान, माया और लोभ से दूर रहकर क्षमा, संयम, अहिंसा और करुणा को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी।

भजन-स्तवन और मेले की रौनक

दिनभर भजन, स्तवन और धार्मिक गीतों से श्रद्धालु भावविभोर रहे। वार्षिक मेले में सजी दुकानों पर पूजा सामग्री, धार्मिक वस्तुओं एवं अन्य आवश्यक सामग्री की खरीदारी भी हुई। विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं की उपस्थिति से तीर्थक्षेत्र में धार्मिक चहल-पहल बनी रही।

नीलेश जैन एवं संजय जैन ने कहा कि सिहोनियां का वार्षिक मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जिनशासन की परंपरा, संस्कार और सामूहिक धर्मभावना का उत्सव है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को तीर्थंकरों के वीतराग संदेश से जोड़ने का माध्यम बनते हैं।

श्रीफल साथी : अजय जैन, अंबाह