गुरु वंदना के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआसिद्ध चक्र महामंडल विधान के तहत सुबह संघ सान्निध्य में जिनेंद्र भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की गई। इसके बाद मुनि श्री के प्रवचन एवं विभिन्न आयोजन हुए। फिर विधान-पूजन एवं आराधना की गई। सायंकालीन सभा में श्रीजी की आरती, विधान मंडल की आरती, गुरु की आरती-भक्ति, गुरु वंदना के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान मंच कलाकारों की टीम के साथ विधान पुण्यार्जक सौधर्म इंद्र परिवार के सदस्यों ने राजा श्रीपाल और सती रानी मैना सुंदरी के नाटक का प्रभावी रूप से मंचन किया।
सती मैना सुंदरी द्वारा सिद्ध चक्र महामंडल विधान आराधना पूजन के माध्यम से जिनेंद्र भक्ति के प्रभाव से श्रीपाल राजा और सात सौ कोढ़ियों के श्रीजी का गंधोदक छिड़कने से भयंकर कुष्ठ रोग दूर करने की नाटिका का प्रभावी मंचन किया गया और जैन धर्म में श्रद्धा और भक्ति का फल बताया गया।





