दाहोद के महावीर नगर स्थित श्री 1008 शांतिनाथ जिनालय में 16 दिवसीय शांतिनाथ महामंडल विधान का भव्य समापन हुआ। 4 लाख 11 हजार मंत्रों के विश्व शांति महायज्ञ और 3100 श्रीफलों की महर्चना ने पूरे शहर में धार्मिक उत्साह भर दिया। श्रीफल साथी राजेश नीता जैन की रिपोर्ट......

“धर्म की धारा बहे तो शहर में शांति अपने आप उतर आती है…”

दाहोद के महावीर नगर स्थित श्री 1008 शांतिनाथ जिनालय में चल रहा 16 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान आज विधि-विधान से सम्पन्न हुआ।

आचार्य श्री सन्मति सागर जी और प्रकृताचार्य श्री सुनील सागर जी के आशीर्वाद में, तपस्वी मुनि श्री 108 सुमंत्र सागर जी के सान्निध्य में विधान ने पूर्णता पाई।

श्रद्धा और भक्ति का संगम

दाहोद दिगंबर जैन समाज के साथ-साथ कई बाहरी नगरों से आए श्रावकों ने भी विधान में हिस्सा लेकर पुण्य संचय किया।

16 परिवारों ने अंतिम दिन 16 लीटर दूध से दुग्धाभिषेक और पंचामृत अभिषेक का लाभ लिया।

विश्व शांति महायज्ञ

मुनि श्री के मुखारविंद से

4 लाख 11 हजार मंत्रों के जप के साथ विश्व शांति महायज्ञ आयोजित हुआ, जिसमें—

- रोग-शोक नाशक

- व्यापार वर्धक

- लक्ष्मी प्रादायक

- दुख-पीड़ा निवारक

- भूत-प्रेत बाधा निवारण

- कुल-गोत्र की सुख-शांति हेतु विशेष मंत्रावली

का उच्चारण किया गया।

3100 श्रीफलों की महार्चना

विधान का मुख्य आकर्षण रहा —

3100 श्रीफलों से की गई भव्य महर्चना,

जिसने पूरे जिनालय को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

महिला मंडल, गुरु-भक्त परिवार और बड़ी संख्या में समाजजनों ने धर्म-लाभ लेकर उत्सव में सौभाग्य जोड़ा।

“जिनवाणी की ज्योति जहां जलती है, वहां शांति और समृद्धि स्वयं रास्ता बनाकर आती है…”