सनावद। पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के अंतर्गत आचार्य श्री शांतिसागर वर्धमान देशना संत निलय, बड़ा मंदिर में उत्तम तप धर्म की श्रद्धापूर्वक आराधना की गई। परम पूज्य पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 विशुद्धसागरजी महाराज के संघस्थ बाल ब्रह्मचारी संजय भैया के पावन सान्निध्य में धर्मसभा आयोजित हुई।

प्रातःकाल जिनेंद्र देव का पंचामृत अभिषेक, शांतिधारा एवं संगीतमय पूजन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

तपना अर्थात इच्छाओं को रोकना

ब्रह्मचारी संजय भैया ने उत्तम तप धर्म पर प्रवचन देते हुए कहा कि तप का अर्थ तपना और अपनी इच्छाओं को नियंत्रित करना है। जिस प्रकार सोना अग्नि में तपकर शुद्ध होता है, उसी प्रकार आत्मा तप के माध्यम से शुद्ध होती है।

उन्होंने बताया कि उपवास, एकासन और रस परित्याग बाह्य तप हैं, जबकि प्रायश्चित, विनय, स्वाध्याय और ध्यान अंतरंग तप के रूप हैं। सच्चा तप वही है, जो अहंकाररहित होकर आत्मकल्याण के लिए किया जाए।

आरती और भक्ति से गूंजा जिनालय

सायंकाल प्रदीप पंचोलिया, लक्ष्मी जैन, सभ्यता जैन, संगीता पाटोदी एवं सृष्टि जैन द्वारा श्रीजी की आरती एवं भक्ति की गई। प्रवचन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

पुण्यार्जक परिवार

पूर्ण सुगंधित जल कलश का सौभाग्य विशाल कुमार-वारिश कुमार-सौभाग्यचंद परिवार को प्राप्त हुआ। शांतिधारा का सौभाग्य तरिषी-प्रांशुल कुमार तथा सुषमा-प्रदीप पंचोलिया परिवार को मिला।

श्रीफल साथी : सन्मति जैन काका