सनावद, 24 सितंबर। पर्वाधिराज दशलक्षण पर्व के अवसर पर आचार्य श्री शांतिसागर वर्धमान देशना संत निलय, बड़ा मंदिर में उत्तम आकिंचन्य धर्म की श्रद्धा एवं भक्ति भाव से आराधना की गई। परम पूज्य पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 विशुद्धसागरजी महाराज के संघस्थ बाल ब्रह्मचारी संजय भैया जी के पावन सान्निध्य में धर्मसभा संपन्न हुई।
अभिषेक और संगीतमय पूजन
प्रातः जिनेंद्र देव का पंचामृत अभिषेक, शांतिधारा एवं संगीतमय पूजन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। पूर्ण सुगंधित जल कलश का सौभाग्य आर्ष, अनुभव कुमार एवं इंदरचंद सराफ परिवार को प्राप्त हुआ। शांतिधारा का सौभाग्य उत्कर्ष, हृदय, अंशिता, प्रतीक एवं वीरेंद्र कुमार जैन परिवार को मिला।
पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में बड़े अभिषेक का सौभाग्य नंदलाल जैनी परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर अशोक पंचोलिया, सुधीर जैन एवं उर्मिला जैन उपस्थित रहे।
‘किंचित मात्र भी पर-पदार्थ मेरा नहीं’
धर्मसभा में ब्रह्मचारी संजय भैया ने कहा कि आकिंचन का अर्थ है—जिसके पास कुछ भी अपना न हो। आत्मा के ज्ञान, शांति और आनंद जैसे स्वभावगत गुणों के अतिरिक्त संसार में कोई भी भौतिक वस्तु, शरीर या संपत्ति वास्तव में अपनी नहीं है।
उन्होंने कहा कि आकिंचन धर्म केवल बाहरी वस्तुओं को छोड़ने का नाम नहीं है, बल्कि मन से ‘मेरा’ और ‘मेरी’ की आसक्ति तथा अधिकार भाव को मिटाने की साधना है। जब साधक पर-पदार्थों के प्रति ममत्व छोड़ता है, तभी मोक्ष मार्ग प्रशस्त होता है।
25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी
25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर्व के अवसर पर आदिनाथ जिनालय, सुपार्श्वनाथ जिनालय एवं पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में दोपहर में श्रीजी का विशेष अभिषेक किया जाएगा। शाम को आरती, भजन-भक्ति एवं प्रवचन के साथ कार्यक्रम संपन्न होंगे।
श्रीफल साथी : सन्मति जैन काका





