सनावद। नगर से तीन किलोमीटर दूर स्थित श्री क्षेत्र पोदनपुरम में चल रही नवदिवसीय नवरात्रि विधान आराधना के अंतर्गत शुक्रवार को बाहुबली मंडल विधान रचाया गया।
आश्विन सुदी छठ के अवसर पर प्रातःकाल श्रीजी के पंचामृत अभिषेक एवं वृहद शांतिधारा के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके बाद आर्यिका ज्ञानमती माताजी द्वारा रचित बाहुबली मंडल विधान संपन्न हुआ।
108 अर्घ्यों से की भगवान बाहुबली की आराधना
विधान में श्रद्धालुओं ने क्रमशः आठ, सोलह, चौबीस एवं 108 अर्घ्य समर्पित कर भक्तिभाव से भगवान बाहुबली की आराधना की। विधान रचाने का सौभाग्य श्रीमती भानुबाई-कमलचंद जटाले, सनावद परिवार को प्राप्त हुआ।
क्षमा, विनम्रता और तप की प्रेरणा
ट्रस्टी वारिश जैन ने बताया कि ज्ञानमती माताजी कृत भगवान बाहुबली विधान क्षमा, अहंकार से मुक्ति तथा कठिन परिस्थितियों में भी अडिग रहकर तप एवं साधना करने की प्रेरणा देता है। यह अनुष्ठान आत्मा को परमात्मा बनाने की भावना पर आधारित है।
समाजजनों ने लिया धर्मलाभ
इस अवसर पर संयम जटाले, प्रीति-श्रीकांत जटाले, भानुबाई-कमलचंद जटाले, स्मिता-सुदेश जटाले, अचिंत्य जैन, लविश पाटनी, प्रत्यूष जैन एवं सुलेखा जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
श्रीफल साथी : सन्मति जैन काका, सनावद





