
सभी भक्तों के द्वारा आचार्य के चरणों में श्रीफल चढ़ाया गया। इस अवसर पर संघस्थ दीदी और स्थानीय पंडित अभिषेक शास्त्री ने कहा कि संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज ऐसे संत हैं, जिनका जीवन एक सम्पूर्ण दर्शन है। जिनके आचरण में जीवों के लिए करुणा पलती है। जिनके विचारों में प्राणी मात्र का कल्याण आकार लेता है। जिनकी देशना में जगत अपने सद्विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।

आप निरीह, निस्पृह वीतरागी हैं फिर भी आपके विचार भारतीयता के प्रति अगाध निष्ठा, राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यपरायणता से ओतप्रोत हैं। आपका चिंतन प्राचीन भारतीय हितचिंतकों, दार्शनिकों एवं संतों का अनुकरण करते हुए भी मौलिक है। आचार्य महाराज तो ज्ञानवारिधि हैं और उनके विचारों को संकलित करना छोटी सी अंजुली में सागर को भरने का असंभव प्रयास करना है।

समाज के मंत्री जैन ललित सेठी, संयोजक जैन सुरेन्द काला, कार्यक्रम संचालन जैन सुनीता सेठी के साथ बहुत लोगों ने भक्ति और अपने उदगार व्यक्त किए। यह जानकारी कोडरमा मीडिया प्रभारी जैन राज कुमार अजमेरा और नवीन जैन ने दी।




