रांची। पर्वराज पर्युषण के अंतर्गत दशलक्षण महापर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म की आराधना श्रद्धा और भक्तिभाव से की गई। मुनि श्री 108 नियोग सागर जी महाराज ने कहा कि शौच का अर्थ केवल शरीर की स्वच्छता नहीं, बल्कि विचारों, भावनाओं और जीवन की आंतरिक निर्मलता भी है। व्यक्ति अपने भीतर की नकारात्मकता, लोभ और अनावश्यक इच्छाओं को कम कर आत्मविकास की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

‘संतोष ही सुखी जीवन का आधार’

मुनि श्री नियोग सागर जी ने कहा कि आज मनुष्य भौतिक संसाधनों को जुटाने की दौड़ में लगा है, जबकि इच्छाओं का कोई अंत नहीं है। वास्तविक सुख और शांति के लिए लोभ छोड़कर संतोष धारण करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति न्यायपूर्वक अर्जित धन में संतुष्ट रहता है और पर-द्रव्य की चाह नहीं रखता, वह आत्मिक पवित्रता की दिशा में आगे बढ़ता है।

समुद्र की तरह इच्छाओं की भी नहीं होती तृप्ति

मुनि श्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार अनेक नदियों का जल मिलने के बाद भी समुद्र भरता रहता है, उसी तरह मनुष्य की इच्छाएं भी भौतिक साधनों के बढ़ने मात्र से समाप्त नहीं होतीं।

उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने भीतर से लोभ कषाय को कम कर संतोष का धन अर्जित करे, तो जीवन में सुख और मानसिक शांति का अनुभव बढ़ सकता है।

युवा पीढ़ी के लिए आत्मनियंत्रण और मानसिक संतुलन का संदेश

उत्तम शौच धर्म के संदर्भ में बताया गया कि तेजी से बदलते समय में युवा पीढ़ी बाहरी सफलता, प्रतिस्पर्धा और तकनीक की दौड़ में व्यस्त है। ऐसे में यह धर्म विचारों और भावनाओं की स्वच्छता के साथ आत्मनियंत्रण, संतोष और स्पष्ट सोच अपनाने की प्रेरणा देता है। बाहरी उपलब्धियों के साथ मन की शांति और जीवन में संतुलन बनाए रखना भी आत्मविकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

रांची के जिनालयों में विशेष पूजा-अर्चना

पर्युषण महापर्व के अवसर पर रांची के दोनों जिनालयों में विशेष पूजा-अर्चना हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। अपर बाजार जैन मंदिर के बड़े हॉल में सामूहिक पूजन के बाद शास्त्र वाचन एवं मंडल पूजन किया गया।

अपर बाजार मंदिर में संजय कुमार-अजय कुमार-अरविन्द कुमार-रोहित कुमार बाकलीवाल परिवार तथा राजेश कुमार-कौशल कुमार-श्रेयांश कुमार बड़जात्या परिवार ने शांतिधारा का पुण्यार्जन किया।

वासुपूज्य जिनालय में भी हुई शांतिधारा

वासुपूज्य जिनालय में नन्दलाल-सुधीर कुमार-संदीप कुमार छाबड़ा परिवार एवं मूलचन्द-प्रेरक कुमार सोगानी परिवार ने शांतिधारा की।

सामूहिक पूजन के दौरान विनोद-स्नेहलता झांझरी परिवार, राजेन्द्र कुमार-रजत कुमार-अनीता-ऐश्वर्या बाकलीवाल परिवार, रजनी देवी-रितेश-रियांश-हितार्थ लुहाड़िया परिवार तथा शिखरचन्द-राजीव कुमार-प्रिंस कुमार-रुचिका गंगवाल परिवार ने भी शांतिधारा में सहभागिता की।

‘आपकी अदालत’ में उठे समाज के ज्वलंत मुद्दे

संध्याकालीन शास्त्रसभा के बाद जैन महिला जागृति की ओर से ‘आपकी अदालत’ शीर्षक से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। इसके माध्यम से समाज के विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को मंच पर प्रस्तुत कर चिंतन का संदेश दिया गया। कार्यक्रम की जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।