पीठ। जैन धर्म के दशलक्षण धर्म में छठा धर्म उत्तम संयम धर्म है। मन, वचन और शरीर पर नियंत्रण रखना तथा इंद्रियों और इच्छाओं को मर्यादित करना ही इसका मूल संदेश है।
केवल इच्छाओं को दबाना संयम नहीं है, बल्कि विवेकपूर्वक अपने व्यवहार को नियंत्रित करना और किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचाने का प्रयास करना भी संयम की साधना का महत्वपूर्ण अंग है।
अभिषेक, पूजन एवं आरती हुई
अध्यक्ष राजकुमार डेचिया ने बताया कि उत्तम संयम धर्म के अवसर पर श्रीजी का अभिषेक, पूजन, आरती, प्रतिक्रमण एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धापूर्वक संपन्न हुए।
पुण्यार्जकों का रहा सहयोग
कार्यक्रम के पुण्यार्जक हितेषी-परेश जी भूता एवं रीना-सुनील जी भूता रहे। कार्यक्रम में शशि देवी सहित अन्य परिवारजन एवं समाजजन उपस्थित रहे।
प्रेषक : राजकुमार डेचिया, अध्यक्ष




