मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचन में कहा कि जीवन का सवाल सफलता का नहीं, बल्कि सार्थकता का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में लोग सफलता के पीछे इतने अंधे हो गए हैं कि जीवन की सार्थकता और नैतिकता को ही खो बैठे हैं। अवधपुरी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर...
अवधपुरी। मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचन में कहा कि जीवन का सवाल सफलता का नहीं, बल्कि सार्थकता का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में लोग सफलता के पीछे इतने अंधे हो गए हैं कि जीवन की सार्थकता और नैतिकता को ही खो बैठे हैं। मुनि श्री ने कहा कि हर व्यक्ति को सबसे पहले अपनी कमियों और कमजोरियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। जब व्यक्ति अपने दायित्वों को सही ढंग से निभाता है, तभी जीवन सार्थक होता है। उन्होंने पिता के कर्तव्यों पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जब आप पिता बनते हैं, तो आपके ऊपर बहुत-सी जिम्मेदारियां आ जाती हैं। बच्चों को संस्कारित बनाना, उन्हें उत्तम शिक्षा दिलाना और सेवा-भाव जगाना यही सच्चे पिता का धर्म है।श्रद्धा की आंख में कोई प्रश्न नहीं होता
एक प्रश्न के उत्तर में मुनि श्री ने कहा सरलता को समझने के लिए व्यक्ति का भीतर और बाहर दोनों से सरल होना आवश्यक है। जिसका जीवन खुली किताब की तरह होता है, उसे पढ़ने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने श्रद्धा और समर्पण के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रद्धा की आंख में कोई प्रश्न नहीं होता, बल्कि वह समर्पण के भाव से भरकर काम को त्वरित गति से करती है। युवाओं को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि जीवन को सार्थक बनाने के लिए पहले लक्ष्य बनाओ, फिर पुरुषार्थ जगाओ, और पुरुषार्थ में कभी कमी मत आने दो। हमारा पुरुषार्थ तभी फलता है जब हम उसे पूरी शक्ति और निष्ठा से करते हैं।
गुरु को हृदय में स्थान दो, सदा तुम्हारे साथ रहेंगेप्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ इन दिनों अवधपुरी में विराजमान हैं। 27 नवंबर से राहतगढ़ में श्री 1008 भगवान जिनेंद्र के पंच कल्याणक महा महोत्सव का आयोजन ससंघ सान्निध्य में होगा। जिसके लिए शीघ्र ही मुनिसंघ का विहार राहतगढ़ की ओर संभावित है। गुरुकुलम् के 180 छात्र मुनि श्री के सान्निध्य में रह रहे हैं, उनके संभावित विहार से भावुक दिखाई दिए। मुनि श्री ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि गुरु से राग होना अच्छा है, लेकिन मोह नहीं होना चाहिए। साधु आपके पास कुछ समय के लिए आते हैं, फिर उन्हें आगे बढ़ना ही होता है। गुरु को हृदय में स्थान दो, तो वे सदा तुम्हारे साथ रहेंगे। उन्होंने सभी छात्रों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि मन लगाकर पढ़ाई करें और अपने गुरुकुल तथा गुरुदेव की मान-मर्यादा का सदैव ध्यान रखें।




