आगरा। शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर सेक्टर 7 आवास विकास कालोनी सिकंदरा में पर्युषण महापर्व के मौके चौथे दिन शनिवार को उत्तम शौच धर्म के दिन सामूहिक आरती और संगीतमय पूजन किया गया। विधि-विधान की क्रिया श्री सिद्धांत शास्त्री मथुरा ने करवाई। सर्वप्रथम मूल नायक भगवान श्री शांतिनाथ जी का अभिषेक 4 महानुभावों ने किया। चारों इंद्र की ओर से रजत मुकुट और माला धारण कर रजत झारियों से पांडुक शिला पर विराजमान श्री पदम प्रभू भगवान की शांतिधारा भी की गई। अस्सी पुजारियों ने पांडुक शिला पर विराजमान श्री चंद्राप्रभु भगवान का अभिषेक किया। इसके बाद सामूहिक आरती संगीतमय पूजन किया गया। इस अवसर पर पंडित सिद्धांत शास्त्री ने बताया कि जैसे किसी गंदी नाली में यदि अमूल्य रत्न गिर जाए तो कौन बुद्धिमान उसे छोड़कर आगे बढ़ेगा? अर्थात् कोई नहीं। अमूल्य रत्न के लोभ के कारण उस गंदी नाली में हाथ डालने से उसके मन में लेशमात्र भी ग्लानि नहीं आएगी। अगर उसके मन में ग्लानि आएगी तो उसमें गिरा हुआ रत्न भी उसको प्राप्त होना अत्यंत दुर्लभ समझना चाहिए। इसी से सम्यक दृष्टि जीव शरीरस्थ आत्म स्वरूप की प्राप्ति जब तक न हो तब तक उस शरीर के प्रति घृणा न करके बाह्मोपचार करते हुए शरीरस्थ शुद्धात्मा की प्राप्ति कर लेते हैं। सत्पुरुष ज्ञानी किसी रोगी या कोढ़ी (कुष्टि) लोगों के शरीरादि को देखकर उनके प्रति घृणा नहीं करते।

इस अवसर पर यह समाजजन मौजूद रहे

इस मौके पर श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन समिति के अध्यक्ष अतुल जैन, मंत्री राकेश जैन, मगनकुमार जैन, प्रवीण जैन, महेशचंद्र जैन, राजेश बैनाड़ा, विजय जैन निमोरब, अरुण जैन, अनिल आदर्श जैन, हेमा जैन, सतीश जैन, राजेंद्र जैन, जितेश जैन, विपुल जैन, मोहित जैन, सिद्धार्थ जैन, प्रशांत जैन, वैभव जैन, दिपेश जैन, चंदन जैन, आदिश जैन, शुभम जैन, अनन्त जैन, विपिन जैन, अभिषेक जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन और सकल जैन समाज मौजूद था।