कोटा। बारां जिले के शेरगढ़ में घोषित अभयारण्य क्षेत्र में हजारों वर्ष पुराने जैन मंदिरों एवं जिनालयों के पुरातात्विक अवशेष आज भी मौजूद हैं। इन ऐतिहासिक धरोहरों की पहचान और संरक्षण के लिए कार्यरत संस्था इंटेक (INTACH) द्वारा पूर्व में कोटा उपवन संरक्षक कार्यालय को सांकेतिक बोर्ड लगाने सहित संरक्षण संबंधी आवश्यकताओं को लेकर निवेदन दिया गया था। वन विभाग ने प्रमुख पुरातात्विक स्थलों पर संकेतक बोर्ड लगाने की स्वीकृति प्रदान की है।

नवनियुक्त उपवन संरक्षक का अभिनंदन

वन विभाग के इस सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करने तथा नवनियुक्त उपवन संरक्षक प्रमोद धाकड़ का अभिनंदन करने के लिए पुरातत्व एवं तीर्थ संरक्षण से जुड़े पदाधिकारी उनसे मिले। इस दौरान शेरगढ़ की जैन पुरातात्विक विरासत के संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।

भ्रमण में सामने आईं महत्वपूर्ण धरोहरें

इंटेक के कोटा कन्वीनर निखिलेश सेठी ने बताया कि कोटा के प्रबुद्ध पुरातत्वविद एवं लेखक डॉ. आर.के. जैन तथा इंटेक सदस्य पी.सी. जैन ने शेरगढ़ क्षेत्र की पुरातात्विक महत्ता की ओर ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद इंटेक सदस्य एकता धारीवाल के नेतृत्व में सदस्यों ने वन विभाग के सहयोग से क्षेत्र का भ्रमण किया।

भ्रमण के दौरान पहाड़ी पर चट्टानों पर उकेरे गए जिनबिम्ब, नीचे स्थित जैन बगीची तथा पूर्व जैन आचार्यों की चरण छतरियां देखने को मिलीं।

संकेतक बोर्ड की आवश्यकता

निखिलेश सेठी ने बताया कि अभयारण्य घोषित होने के बावजूद इन महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों की पहचान एवं जानकारी देने वाले संकेतक बोर्ड वहां नहीं थे। इस आवश्यकता को देखते हुए इंटेक ने तत्कालीन उपवन संरक्षक अनुराग भटनागर को पत्र दिया था। उनके स्तर से तत्परता दिखाते हुए सांकेतिक बोर्ड लगाने की स्वीकृति प्रदान की गई।

पाडाखोह के संरक्षण का मुद्दा

इस अवसर पर श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा (हाड़ौती संभाग) के महामंत्री राकेश जैन ‘चपलमन’ ने शेरगढ़ अभयारण्य क्षेत्र में आने वाले पाडाखोह के संरक्षण का मुद्दा भी उठाया।

उन्होंने बताया कि विश्व प्रसिद्ध अतिशय क्षेत्र चांदखेड़ी की प्रतिमा का उद्गम स्थल पाडाखोह भी इसी क्षेत्र में स्थित है। यहां चरण छतरी क्षतिग्रस्त अवस्था में है तथा जैन बगीची में भी असामाजिक तत्वों द्वारा पुरातात्विक धरोहर को नुकसान पहुंचाया गया है। साथ ही पहाड़ी तक पहुंचने के लिए सुगम मार्ग का अभाव है।

संरक्षण और पहुंच मार्ग की मांग

राकेश जैन ने आग्रह किया कि इन ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण, मरम्मत एवं पहुंच मार्ग की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि अभयारण्य में आने वाले पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य के साथ क्षेत्र की समृद्ध जैन पुरातात्विक विरासत का भी सहज अवलोकन कर सकें।

वन विभाग ने दिया सहयोग का आश्वासन

नवनियुक्त उपवन संरक्षक प्रमोद धाकड़ ने कहा कि उन्हें पदभार संभाले अभी कम समय हुआ है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे शीघ्र ही पुरातत्व प्रेमियों के साथ संबंधित स्थलों का भ्रमण करेंगे तथा नियमानुसार आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगे। इस अवसर पर पर्यावरण पत्रकार बृजेश विजयवर्गीय भी उपस्थित रहे।