महरौनी, ललितपुर। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज महरौनी (जी.जी.आई.सी.) में परम पूज्य गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य मुनि श्री 108 विकौशल सागर जी महाराज का प्रेरणादायी एवं आध्यात्मिक संबोधन आयोजित किया गया। मुनिश्री के विचारों ने छात्राओं को जीवन में नैतिकता, सदाचार और संस्कारों को अपनाने की प्रेरणा दी
पांच सूत्रीय अभियानों से जुड़ने का संदे
संबोधन के दौरान मुनिश्री ने छात्राओं को अहिंसा, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सप्त व्यसनों का त्याग, शाकाहार शैली अपनाने तथा अंतर्जातीय विवाह के निषेध जैसे पांच सूत्रीय अभियानों से जुड़ने का संदेश दिया।
उन्होंने इन सूत्रों के माध्यम से छात्राओं को संस्कारयुक्त एवं अनुशासित जीवन अपनाने की प्रेरणा दी।
शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी
मुनि श्री विकौशल सागर जी महाराज ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं है, बल्कि संस्कारों एवं नैतिक मूल्यों से युक्त श्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण करना भी है। शिक्षा तभी सार्थक होती है, जब वह व्यक्ति को जीवन की सही दिशा प्रदान करे।
सदाचार और अनुशासन का बताया महत्व
मुनिश्री ने सदाचार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए छात्राओं को सकारात्मक सोच और अच्छे संस्कार अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जीवन में अच्छे आचरण को व्यक्तित्व की महत्वपूर्ण पहचान बताया।
छात्राओं के लिए प्रेरणास्पद रहा संबोधन
मुनिश्री का आध्यात्मिक एवं नैतिक संदेश छात्राओं के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणास्पद रहा। छात्राओं ने उनके विचारों को गंभीरता से सुना। कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा के साथ संस्कार, अहिंसा और सदाचार के महत्व को प्रमुखता से सामने रखा गया।
नितिन जैन शास्त्री ने किया संचालन
कार्यक्रम का संचालन नितिन जैन शास्त्री ने किया। विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती शीलम गुप्ता ने मुनिश्री के प्रति आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी विद्यालय में इसी प्रकार के ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी उद्बोधन आयोजित किए जाने का आग्रह किया।
छात्राओं और शिक्षक-शिक्षिकाओं की रही उपस्थिति
इस अवसर पर विद्यालय की समस्त छात्राएं, शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा मुनिश्री के सानिध्य में रहने वाले शिष्यगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने छात्राओं को शिक्षा के साथ जीवन मूल्यों और संस्कारों को आत्मसात करने का संदेश दिया।





