गुरुवार को अशोकनगर में सुभाष गंज जैन मंदिर प्रांगण में मंगल अगवानी गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर हुई। धर्मसभा में मुनि श्री सुधा सागर महाराज जी ने कहा कि श्रवण संस्कृति व भारत की पवित्र और मंगलमयी संस्कृति विचारों का केन्द्र नहीं आचार का केंद्र है। अशोक नगर से पढ़िए, हरिहर सिंह चौहान की यह खबर...
अशोकनगर। संत समाज व शासन-प्रशासन जब साथ होता है तो संगम की यह त्रिवेणी जब संस्कृति परंपरा और संस्कारों की और अग्रसर होती है। यहां तो देश के अखण्ड भारत की परिकल्पना है जो तभी साकार होती है। जब समाजजन इसी प्रकार एकता व भाईचारे का परिचय देते हैं। यह सिंह गर्जना जिन शासन के शेर मुनि श्री सुधा सागर जी ने कही। गुरुवार को महाराज जी ससंघ का अशोकनगर में भव्य अगवानी देखकर मन प्रफुल्लित हो गया। सागर जिले के ईशुरवारा गांव में जन्मे जयकुमार जैन ने आचार्य श्री विद्यासागर जी से 1983 में मुनि दीक्षा ग्रहण की थी। पूर्व नाम क्षुल्लक व ऐलक दीक्षा में परम सागर जी था। उसके बाद मुनि श्री सुधा सागर जी बने। आप की कठोर तप साधना के बल से आप ने बहुत सारे पंचकल्याणक मंदिरों के जीर्णोद्धार कार्य करवाए। सबसे खास जब जयपुर के सांगानेर में भू-गर्भ से दो बार यक्ष रक्षित रत्नमयी चैत्यालय निकलकर जैन समाज को चमत्कृत किया।
तभी से आप की पहचान जिन शासन के शेर के रूप में पहचानी जाने लगी। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक के रूप में भक्त उन्हें राम के सबसे बड़े भक्त हनुमान के रूप में जानने लगे।
धर्म श्रवण संस्कृति को महत्वपूर्ण स्थान देता हैगुरुवार को अशोकनगर में सुभाष गंज जैन मंदिर प्रांगण में मंगल अगवानी गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर धर्मसभा में मुनि श्री सुधा सागर महाराज जी ने कहा कि श्रवण संस्कृति व भारत की पवित्र और मंगलमयी संस्कृति विचारों का केन्द्र नहीं आचार का केंद्र है। धर्म विचारों के साथ श्रवण संस्कृति को महत्वपूर्ण स्थान देता है। आचार का माहौल या आचरण के इस श्रवण संस्कृति में इस मंगल बेला भारत अब संस्कारो का रसपान कर रहा है। प्रथम दर्शन शगुन बहुत बड़ा होता है तभी तो आज हजारों जन समुदाय व भक्तों की इस भीड़ में शासन प्रशासन के अधिकारी भी नंगे पैर चल रहे थे। यह बहुत बड़ी बात है दिगंबर जैन समाज के लिए। दिगंबर जैन संत के दर्शन का शगुन कभी भी फेल नहीं होता, यह अच्छा शुभ अवसर है अशोक नगर के लिए। क्योंकि जगत कल्याण के भाव से प्रसार प्रचार करने को यह चातुर्मास में देखने को मिलेगा।
जब देवता भी मुस्कराहट बिखरा रहे हैगुरुवार व गुरु पूर्णिमा के शुभ दिन मंगल अगवानी यह भी तो शुभ संकेत है। आज तक ललितपुर की अगवानी सबसे ज्यादा प्रसिद्ध थी पर आज अशोक नगर ने तक्कर देकर अव्वल आ गए है। जो भी किया गया वह बहुत ही बढ़िया है। जब देवता भी मुस्कराहट बिखरा रहे हैं। आज यहां का वातावरण उत्साह व उमंगता के रूप में प्रवेश के समय हर एक घर के बहार कोई भी समाज के हो उन्होंने अपने अपने घरों के बाहर झाड़ू लगाई कहने लगे कि गुरुदेव आने वाले हैं। इतनी सकारात्मक सोच जब सिख धर्म मुसलमान व अन्य हिन्दु धर्म के अनुयायियों ने भी बढ़चढ़ कर इस नगर अगवानी में हिस्सा लिया। बिना किसी विकल्प के सब कार्य पूर्ण हो गए। इस नगर अगवानी में 33 जेसीबी मशीनों से पुष्प वर्षा और चांदी की 121 थालियों से पाद प्रक्षालन हुआ।




