इंदौर। तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज से दीक्षित एवं चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज की पावन छत्रछाया में साधनारत मुनि श्री सुकुमालसागर जी महाराज ने सोमवार को उत्तम समाधि मरण को प्राप्त किया। मुनि श्री 24 वर्षों से निरंतर संयम एवं साधना के पथ पर साधनारत रहे। 7 दिवसीय निर्जल उपवास करते हुए सल्लेखना समाधि की ओर निरंतर अग्रसर मुनि श्री ने 31 अगस्त को संध्याकाल 6:30 बजे, नेमीनगर जैन कॉलोनी इंदौर में आचार्य श्री के मुखारविंद से नवकार मंत्र सुनते हुए शांत एवं पवित्र भावों के साथ उत्तम समाधि मरण को प्राप्त किया। दिगंबर जैन समाज जनों ने जैन धर्म की पावन सल्लेखना एवं समाधि साधना की महान परंपरा को नमन किया है। श्री सुनील सागर युवा संघ भारत ने

मुनि श्री की आत्मा उत्तरोत्तर उन्नति करते हुए मोक्षमार्ग में अग्रसर हो ऐसी मंगल भावना भाई।