आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के शिष्य मुनि श्री प्रवीर सागर महाराज ने बुधवार को केशलोच किया, इस दौरान मुनि श्री का उपवास रहा। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर...
रामगंजमंडी। आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के शिष्य मुनि श्री प्रवीर सागर महाराज ने बुधवार को केशलोच किया, इस दौरान मुनि श्री का उपवास रहा। केश लोच के बारे में विदित है कि स्वयं के हाथों बिना किसी अस्त्र के अपने हाथों से घास फूस की तरह संत केशों को निकालते हैं, जो अपने आप में एक उत्कृष्ट साधना होती है। गुरुदेव बिना कुछ खाए पिए भूख और प्यास को सहन करते हुए आज उपवास पर रहेंगे, जो अपने आप में एक उत्कृष्ट तप साधना के रास्ते कामना के वास्ते चल दे राही चल। यदि इसके बारे में जाने तो यह करना कोई साधारण बात नहीं है, यह जैन संतों का सबसे कठोर तप माना गया है। आम आदमी के जीवन में यदि एक बार गलती से बाल उखड़ जाए तो वह दर्द के मारे कांपने लगता है लेकिन, जैन संत तो बिना किसी औजार के सीधे अपने हाथों से बालों को खींचकर निकाल देते हैं। जैन संत सदा स्वावलंबी होते हैं, वे किसी को भी कष्ट न देते हुए स्वयं की साधना करते हैं।
चाहे कैसा भी कष्ट क्यों ना हो। वे समभाव में उसे सहन करते हुए मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होते हैं। जैन संत अहिंसा व्रत के पालन के साथ ही शरीर से राग भाव को भी हटाते हैं। साधु शरीर की सुंदरता को नष्ट करने के लिए अहिंसा धर्म का पालन करते हुए केशलोच करते है। जब जैन संत स्वयं के हाथों केशलोच करते है तो उनके चेहरे पर मुस्कुराहट देखने को मिलती है। जो अपने आप में पंचम युग में एक उत्कृष्ट साधना है।




