बड़ामलहरा। धर्म नगरी बड़ामलहरा में पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के ज्येष्ठ शिष्य 108 श्री प्रशम सागर जी महाराज एवं 108 श्री योग्य सागर जी महाराज का मंगल चातुर्मास चल रहा है। चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन समाज के श्रावक-श्राविकाओं को धर्मलाभ प्राप्त हो रहा है और धर्म एवं ज्ञान की धारा प्रवाहित हो रही है।

मंगल प्रवचनों के साथ कराया अनुष्ठान

रविवार को आयोजित मंगल प्रवचन के दौरान मुनि द्वय ने श्रावकों को मंत्र जाप अनुष्ठान एवं मुद्रा विधि के संबंध में जानकारी दी। मुनिश्री ने श्रावकों को अनुष्ठान की विधि समझाते हुए धार्मिक भावनाओं के साथ इसमें सहभागी बनने के लिए प्रेरित किया।

तन-मन-धन से सहभागी बनने का आह्वान

मुनिश्री ने कहा कि अनुष्ठान में श्रद्धा और समर्पण के साथ सहभागी होना चाहिए। उन्होंने श्रावकों से तन, मन और धन से अनुष्ठान करने का आह्वान किया। यहां धन से आशय घर से एक दीपक और जाप माला लेकर आने से बताया गया।

मुनिश्री ने कहा कि इस प्रकार श्रद्धापूर्वक किए गए अनुष्ठान का फल साधक स्वयं अनुभव कर सकता है तथा धार्मिक वातावरण में परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की मंगल भावना की जा सकती है।

समाज के सभी वर्गों ने लिया धर्मला

मंत्र जाप अनुष्ठान एवं मुद्रा विधि में समाज के सभी वर्गों के श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की। श्रद्धालुओं ने धार्मिक भावों के साथ अनुष्ठान में भाग लेकर पुण्य का संचय किया और मुनिश्री के मंगल सान्निध्य एवं प्रवचनों का लाभ लिया।

चातुर्मास में बह रही ज्ञान की धारा

बड़ामलहरा में चल रहे मुनि द्वय के मंगल चातुर्मास के दौरान नियमित रूप से धार्मिक आयोजन, प्रवचन एवं विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियां हो रही हैं। इससे समाज के लोगों को धर्म, साधना और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है।

धर्म और साधना का संदेश

मंत्र जाप एवं अनुष्ठान के माध्यम से श्रद्धालुओं को नियमित धार्मिक साधना, सकारात्मक भावों और आध्यात्मिक जीवन की ओर प्रेरित किया गया। मुनिश्री के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजनों की सहभागिता रही।