"मुरैना। दशलक्षण पर्व के आठवें दिन बड़े जैन मंदिर में उत्तम त्याग धर्म की श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ आराधना की गई। मंदिर में विराजमान जैनाचार्य उदारसागरजी महाराज एवं मुनि उपशांतसागरजी महाराज के प्रवचन का बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लाभ लिया।

त्याग वस्तु का नहीं, ममत्व का हो

आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज ने कहा कि त्याग का अर्थ केवल किसी वस्तु को छोड़ देना नहीं है, बल्कि उसके प्रति मन में उत्पन्न ममत्व, मोह और आसक्ति का त्याग करना ही वास्तविक त्याग है। वस्तुओं का उपयोग करना गलत नहीं है, किंतु उनके प्रति अत्यधिक मोह और संग्रह की भावना आत्मा को संसार के बंधन में बांधती है।

उन्होंने कहा कि जीवन में त्याग की भावना आवश्यक है। आवश्यकता से अधिक संग्रहित वस्तुएं और उनके प्रति बढ़ता ममत्व आत्मकल्याण के मार्ग में बाधक बनता है।

नाव और पानी के दृष्टांत से समझाया त्याग

आचार्यश्री ने कहा कि जिस प्रकार नाव में पानी भरने पर उसे डूबने से बचाने के लिए पानी बाहर निकालना पड़ता है, उसी प्रकार जीवन में आवश्यकता से अधिक संग्रह हो जाने पर उसका त्याग अथवा दान करना चाहिए। आवश्यकता से अधिक वस्तुओं को समाज और जरूरतमंदों के हित में समर्पित करना ही उत्तम त्याग धर्म की भावना है।

उन्होंने कहा कि दान त्याग का एक रूप है, लेकिन क्रोध, मान, छल-कपट, लोभ और राग-द्वेष जैसे भीतर के विकारों का त्याग सबसे बड़ी साधना है। त्याग करते समय प्रदर्शन, सम्मान या प्रशंसा की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए।

भीतर के दोषों का त्याग जरूरी

मुनिश्री उपशांतसागरजी महाराज ने कहा कि जैन दर्शन में त्याग का संबंध केवल बाहरी वस्तुओं से नहीं, बल्कि आत्मा के भीतर छिपे विकारों से भी है। धन का त्याग करने के बाद भी यदि मन में क्रोध और लोभ बने रहें, तो वास्तविक त्याग नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि ‘मेरा’ और ‘तेरा’ की भावना संसार में मोह बढ़ाती है। शरीर और भौतिक वस्तुएं परिवर्तनशील हैं, इसलिए इनका सदुपयोग करते हुए इनके प्रति आसक्ति कम करनी चाहिए।

मुनिश्री ने श्रद्धालुओं से दुर्व्यसनों, बुरी आदतों, कटु वचन, क्रोध, ईर्ष्या और द्वेष का त्याग करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दशलक्षण पर्व के दौरान यदि जीवनभर के लिए एक भी बुराई का त्याग कर लिया जाए तो पर्व की साधना सार्थक हो सकती है।

आज होगी उत्तम आकिंचन धर्म की आराधना

प्रतिष्ठाचार्य पंडित महेंद्रकुमार शास्त्री ने बताया कि आज उत्तम आकिंचन धर्म की आराधना की जाएगी। मुनिराज आकिंचन धर्म की महत्ता एवं आत्मकल्याण में उसकी भूमिका पर प्रवचन देंगे।

श्रीफल साथी : मनोज जैन नायक, मुरैना