सनावद/सीकर ।  करोड़ों मुनियों की मोक्ष स्थली सिद्ध क्षेत्र सिद्धवरकूट-औंकार ममलेश्वर के मुहाने बसे सनावद की 2 प्रतिमा धारी, 11वीं पास 81वर्षीय  मनोरमा जैन सांसारिक जीवन को त्याग, दीक्षा लेकर वैराग्य पथ की और बढ़ गई। आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए सीकर में बुधवार को भगवान पार्श्वनाथ के जन्म कल्याणक मोक्ष सत्तमी के मौके पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के कर कमलों से उन्होंने आर्यिका दीक्षा ग्रहण कर नया नाम आर्यिका सुदृष्टिमति माताजी  पाया। इस दीक्षा कार्यक्रम में सनावद, बड़वाह, इंदौर, लोनारा, कसरावद, महेश्वर, भोपाल,निमाड़- मालवा सहित देश भर के अन्य प्रांतों के धर्मावलंबियों ने भाग लेकर पुण्यार्जक बनने का परम सौभाग्य प्राप्त किया। सीकर में हुए इस अद्भुत दीक्षा महोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए समाज के सन्मति काका और प्रशांत चौधरी ने बताया कि 18 अगस्त को गणधरवलय विधान कर  गुरुपूजा के साथ रात्री में दीक्षार्थियों की गोद भराई कर शोभायात्रा निकाली गई। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के द्वारा प्रदत्त दीक्षा कार्यक्रम के लिए श्री दिगंबर जैन समाज ने भव्य आयोजन सीकर में आयोजित किया। जिसमें 19 अगस्त को प्रातःकाल 5.15 बजे से चालू हुए शास्त्रोक्त दीक्षा कार्यक्रम में .तीन मुनि दीक्षा तीन आर्यिका दीक्षाएं व एक क्षुल्लक दीक्षाएं संपन्न हुई। गृहस्थ जीवन का वैभव छोड़कर त्याग, नियम, संयम के मार्ग पर दीक्षार्थीयों ने हजारों लोगों की मौजूदगी व आचार्य संघ की मंगलमय उपस्थिति में रत्न्त्रय के मार्ग पर चलने के लिए सहर्ष आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज से जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण कर नये नाम पाए।

आचार्य धर्म सागर मण्डप में हुई दीक्षा

 दीक्षा के लिए प्रातः काल चोक पाट लगाकर दीक्षार्थीयों का मंगल स्नान कराया गया। पावन धर्मनगरी में उपस्थित श्रद्धालुओं ने सुबह बैंडबाजों के साथ धूमधाम से दीक्षार्थीयों को जिन मंदिर के दर्शन कराए। दर्शन के बाद उन्हें. आचार्य धर्म सागर मण्डप में लाया गया। यहां दीक्षा की प्रारंभिक क्रियाएँ प्रातः9 बजे से मुनि हितेन्द्र सागर महाराज मुनि ने शुरू की। पाण्डुक शीला पर विराजित जिन शासन नायक त्रिलौकीनाथ भगवान  पार्श्वनाथ स्वामी जी का सभी दीक्षार्थीयों ने रजत कलशों से पंचामृत अभिषेक कर पार्श्वनाथ  जन्म कल्याणक मोक्ष सत्तमी का लाडू समर्पित किया।

दीक्षा के लिए निवेदन

मंच पर विराजित आचार्य वर्धमान सागर महाराज एवंआचार्य संघ का सभी दीक्षार्थीयों ने आशीर्वाद लिया और गुरु चरणों में दीक्षा के लिए निवेदन किया। आचार्य श्री ने दीक्षार्थीयों से जैनेश्वरी दीक्षा प्राप्त करने के लिए पूछा। स्वीकृति मिलने के बाद संघ व जन समुदाय की अनुमोदना के पश्चात दीक्षार्थीयों के पंचमुष्ठी केश लोचन शुरू कर शांति मंत्रों की ब्रम्ह ध्वनि के साथ मंगल द्रव्यों से शुद्धि की गई।

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 सभी दीक्षाथिर्यों ने क्षमा याचना की

दीक्षा संस्कार ठीक 9.05 बजे से आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने शुरू किए। 108 बार मंत्रों से संस्कार दिए गए। तत्पश्चात मंत्रोच्चार के साथ अंजलि में श्रीकार लिखकर सुपारी, चावल एवं श्रीफल से वृत दान किया गया। संघ के नियम व परंपराओं के पाल एक्स एक्सन की स्वीकारोक्ति ली गई। उपस्थित जन समुदाय व संघ से ज्ञात-अज्ञात भूलों और त्रुटियों तथा हुई अवज्ञा के लिए सभी दीक्षाथिर्यों द्वारा क्षमा याचना की गई। इसके बाद मस्तक के ऊपर में वीसी आई सी सीसी सीलक्ष्मी का प्रतीक श्रीकार बनाकर लौंग रखे गए। मुनि  एवं आर्यिका दीक्षार्थियों को 5 महावृतों व 28 मूलगुणों का आरोपण कर 16 प्रकार के मंत्रों द्वारा सोड्स संस्कार संस्थापित किए गए। वर्धमान मंत्र के मंगल आचार्य श्री प्रमुख ने उच्चारित किए। इसके बाद नामकरण संस्कार में सभी दीक्षार्थीयों को नए नाम के साथ पिच्छी, कमण्डलु, शास्त्र आदि उपकरण दिए गए। नामकरण होते ही दीक्षा मंडप में वात्सल्य वारिधि आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज के जयकारों से गूँज उठा।

अब यह नाम से जाने जाएंगे दीक्षार्थी

इन्होंने दीक्षा लेकर नए नाम क्षुल्लक श्री प्राप्ति सागर जी नवीन नाम मुनि श्री तथ्य सागर जी महाराज ,क्षुल्लक श्री प्रतिज्ञा सागर नवीन नाम, मुनि श्री तप सागर जी महाराज ,श्री ब्र.नवरत्न पाटनी आनंदपुर कालू(जयपुर)नवीन नाम मुनि श्रीप्रभास सागर जी महाराज,क्षुल्लिका श्री प्रदीप्त मति माताजी नवीन नाम आर्यिका सौम्य मतिमाताजी, शकुंतला देवी कोठिया नवीन नाम आर्यिका,प्रतिभा मति माताजी, मनोरमा जैन सनावद नवीन नाम आर्यिका सुदृष्टि मति माताजी, महावीर प्रसाद जैन बनेठा, नवीन नाम क्षु.105उदित सागर जी महाराज के नाम से अब जाने जाएंगे।

यहां के श्रद्धालु उपस्थित रहे

कार्यक्रम का शुभारंभ  मंगल गीतों एवं स्थनीय  समाज की महिलाओं के द्वारा मंगलाचरण नृत्य से हुआ। संगीतकार अजीत जैन ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम का संचालन.राकेश सेठी.ने किया।कार्यक्रम में सनावद,बड़वाह, कसरावद, , लोनारा महेश्वर इंदौर, भोपाल सहित निमाड़- मालवा व देशभर के चार हजार से ज्यादा धर्मावलंबियों ने धर्म सभा में भाग लेकर पुण्यार्जन किया ।