स्थानीय भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मुनिराजों के प्रवचन जन-जन के हितकारी हो रहे हैं। यहां प्रतिदिन हो रहे प्रवचनों का स्थानीय समाजजनों के अलावा बाहर से आए श्रद्धालुजन लाभ उठा रहे हैं। मंदिर में मुनिराजों का चातुर्मास जारी है। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर...
नांद्रे। स्थानीय भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मुनिराजों के प्रवचन जन-जन के हितकारी हो रहे हैं। यहां प्रतिदिन हो रहे प्रवचनों का स्थानीय समाजजनों के अलावा बाहर से आए श्रद्धालुजन लाभ उठा रहे हैं। मंदिर में मुनिराजों का चातुर्मास जारी है। पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्रुतसागरजी महाराज नांद्रे में विराजमान हैं। शनिवार को धर्मसभा में मुनि श्री जयंत सागरजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के हस्त कमलों से एक विचार नाम की कृति को लिखा है और उस विचार में आचारी भगवन ने अपने स्वयं के विचार, जो आज के समय व्यक्ति सोचता है, व्यापार कैसे करना है, घर में व्यवहार कैसे करें, मित्रों के बीच में मित्रता कैसे करें। आज के युवा-युवती सही विचार क्या करें।
किस इंसान से व्यवहार रखना चाहिए, इसलिए अपने जीवन को श्रेष्ठ और उत्कृष्ट बनाना हैं तो हमें इस विचार पुस्तक को पढ़ना चाहिए और इस पर विचार करके अपने जीवन को विचारवान बनाकर श्रेष्ठ बनना चाहिए तो अपना जीवन अच्छा बनाओ और जीवन में विचारों कें साथ पुरषार्थ भी करो बिना पुरुषार्थ के एक कदम भी आप जीवन को नहीं जी सकते। जीवन में हर चीज की आवश्यकता और हर वस्तु की कीमत है। छोटे से छोटे पौधे के अंकुर की आवश्यकता भी है। अगर वह अंकुरित नहीं होगा तो आप फल को प्राप्त नहीं कर पाओगे। इसलिए जीवन में श्रेष्ठ विचार करो। पुरषार्थ करो और जीवन को उज्जवल बनाओ।





