महरौनी (ललितपुर)। दशलक्षण महापर्व के समापन अवसर पर श्री अजितधाम से भव्य जिन विमानोत्सव एवं शोभायात्रा श्रद्धा और उल्लास के साथ निकाली गई। इससे पूर्व श्री अजितनाथ बड़ा मंदिर में जिनेंद्र भगवान का जिनाभिषेक एवं शांतिधारा विधि-विधान से संपन्न हुई। भगवान को विमान में विराजमान कर शोभायात्रा प्रारंभ हुई। नगर में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने द्वार-द्वार आरती उतारकर जिनेंद्र भगवान की भक्तिभाव से आगवानी की।

भजनों, डांडिया और चंवर से सजा शोभायात्रा का दृश्य

शोभायात्रा में सकल जैन समाज के श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। धार्मिक धुनों पर युवाओं ने नृत्य किया, बालिकाओं ने डांडिया की आकर्षक प्रस्तुति दी और महिलाएं विमान के आगे चंवर डुलाते हुए चलीं। ढोल-नगाड़ों की गूंज एवं भजनों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

यशोदय तीर्थ में ध्वजारोहण

शोभायात्रा श्री अजितनाथ बड़ा मंदिर से गांधी चौक एवं इंदिरा चौराहा होते हुए श्री यशोदय तीर्थ पहुंची। वहां जिनेंद्र भगवान का अभिषेक-पूजन एवं नवीन ध्वजारोहण किया गया। ध्वजारोहण का सौभाग्य खेमचंद्र कुम्हैड़ी, आनंद सराफ, उत्तमचंद्र सराफ पड़वा, प्रदीप सिलौनया एवं विमल विलौआ को प्राप्त हुआ। आरती का सौभाग्य रवि सराफ को तथा जिनाभिषेक का सौभाग्य मुकेश सराफ, मनोज बजाज, अंकित चौधरी एवं सामंत भायजी को मिला। नगर पंचायत अध्यक्ष नीलम दुष्यंत बड़ौनिया ने सपरिवार जिनेंद्र भगवान के विमान की आरती उतारकर श्रीफल अर्पित किया। संगीतकार सनिल जैन के भजनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति में सराबोर कर दिया।

धर्म को जीवन में धारण करने का संदेश

धर्मसभा में मुनि श्री विकौशलसागर महाराज ने क्षमावाणी पर्व का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि उसे जीवन में धारण करना ही वास्तविक धर्म है। उन्होंने क्षमा, संयम और आत्मशुद्धि को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में सकल दिगंबर जैन पंचायत समिति, श्री चंद्रप्रभु जिनालय कमेटी, श्री यशोदय अंतरराष्ट्रीय कमेटी, शांतिनाथ जिनालय कमेटी, महिला मंडल एवं सकल जैन समाज का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

एक नजर में

- श्री अजितनाथ बड़ा मंदिर में जिनाभिषेक एवं शांतिधारा हुई।

- नगर में जगह-जगह जिनेंद्र भगवान की आरती कर स्वागत किया गया।

- युवाओं के नृत्य और बालिकाओं के डांडिया ने शोभायात्रा को आकर्षक बनाया।

- यशोदय तीर्थ में अभिषेक-पूजन एवं नवीन ध्वजारोहण हुआ।

- मुनि विकौशलसागर ने क्षमावाणी पर क्षमा एवं संयम का संदेश दिया।

पोल : धार्मिक शोभायात्राओं में आपको कौन-सा दृश्य सबसे अधिक भावविभोर करता है?

- द्वार-द्वार आरती एवं जिनेंद्र भगवान की आगवानी

- भजन, जयकारे और समाज की सामूहिक सहभागिता

श्रीफल साथी : राजीव सिंघई