उदयपुर। जैन साहित्य संगम के तृतीय राष्ट्रीय अधिवेशन के शुभारम्भ समारोह में कालजयी-कीर्तिमान कवि छन्दराज ओम पारदर्शी की स्मृति में पारदर्शी फाउंडेशन द्वारा प्रदत्त "पारदर्शी पुरस्कार-2026" वरिष्ठ साहित्यकार-कवि विजयसिंह नाहटा-जयपुर को पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के कर-कमलों से प्रदान किया गया। पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने बीकानेर में आयोजित समारोह में नाहटा द्वारा साहित्य के क्षेत्र में गद्य-पद्य में विशिष्ट सृजन के लिए प्रशस्ति-पत्र, प्रतीकचिह्न, शाल, नवकार उपरणा आदि प्रदान कर सम्मानित किया। नाहटा ने प्रशासनिक पद (राजस्थान सरकार) के पद पर सेवाएँ देते हुए हिन्दी व राजस्थानी पुस्तकों का लेखन कर अनेक पुरस्कार प्राप्त किए हैं । इस अवसर पर बीकानेर विधायक जेठानंद व्यास, डूंगरगढ विधायक ताराचंद सारस्वत, अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्र गाँधी, जैन साहित्य संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीप जैन ’’हर्षदर्शी’, राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र कांठेड़, अधिवेशन संयोजक अशोक नागोरी, वरिष्ठ संरक्षक व राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष कैलाश जैन तरल, साधुमार्गी जैन सेवा समिति बीकानेर के अध्यक्ष कन्हैयालाल बैद, सुश्राविका अनीता-गुलाबचंद कटारिया, अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ के मंत्री सुरेश बच्छावत, अहिंसा प्रचारक महेश नाहटा, अखिल भारतीय साधुमार्गी महिला संघ की महामंत्री प्रीति डागा, जैन महासभा अध्यक्ष कन्हैयालाल बोथरा, पार्श्वचन्द्र गच्छ के अध्यक्ष रविन्द्र रामपुरिया, मंत्री प्रताप रामपुरिया सहित देश के विभिन्न प्रदेशों से आए जैन साहित्यकार व कवि तथा बीकानेर जैन समाज की विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति थी।
ओम पारदर्शी बहुआयामी व्यक्तित्व-कृतित्व धनी थे
उल्लेखनीय है कि "पारदर्शी पुरस्कार" प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है । यह अब तक उज्जैन के कवि कैलाश जैन "तरल" व साहित्यकार दिलीप धींग-चेन्नई को प्रदान किया जा चुका है। पारदर्शी फाउंडेशन के जगदीप जैन "हर्षदर्शी" ने बताया कि ओम पारदर्शी बहुआयामी व्यक्तित्व-कृतित्व धनी थे। उन्होंने काव्य की शाश्वत विधाओं में विपुल सृजन किया था। छन्दराज की उपाधि से अलंकृत पारदर्शी ने मनहरण कवित्त विधा में सर्वाधिक कवित्त सृजन कर विश्व कीर्तिमान बनाया था । कलियुग-कबीर, हास्य-व्यंग्यावतार, आशुकविरत्न, जैनरत्न, देहदानी आदि अलंकरणों से विभूषित कवि पारदर्शीजी ने काव्यमंचों की गरिमा व मर्यादा को बनाए रखते हुए नवोदित मंचीय प्रतिभाओं को तैयार कर उन्हें प्रोत्साहित व प्रतिष्ठित करने का भगीरथी कार्य किया।




