लार (टीकमगढ़)। दिगंबर जैन मंदिर लार में दशलक्षण महापर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म एवं धूप दशमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भक्तों ने विशेष पूजा-अर्चना कर जीवन में संयम धारण करने का संकल्प लिया।
अभिषेक और महाशांतिधारा का सौभाग्य
भगवान के अभिषेक का सौभाग्य विनोद जैन को प्राप्त हुआ। जगत कल्याण की कामना से वृहद महाशांतिधारा का सौभाग्य डॉ. शिखरचंद्र जैन एवं विपिन जैन को मिला। श्रावक-श्राविकाओं ने पारंपरिक केसरिया एवं धार्मिक परिधान धारण कर तीर्थंकर प्रतिमाओं का विधि-विधान से अभिषेक किया और विश्व कल्याण के लिए शांतिधारा प्रवाहित की।
धूप अर्पित कर की संयम धर्म की आराधना
दोपहर में उत्तम संयम धर्म के साथ धूप दशमी का पर्व भक्ति भाव से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में धूप अर्पित की, जिससे मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण सुगंधित एवं भक्तिमय हो उठा।
मंत्रोच्चारण और घंटानाद के बीच भगवान की सामूहिक आरती की गई। भक्त प्रभु भक्ति में झूमते हुए नृत्य करते भी नजर आए।
मन, वचन और काय पर नियंत्रण ही संयम
मुकेश जैन ने उत्तम संयम धर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मन, वचन और काय अर्थात शरीर पर नियंत्रण रखना ही वास्तविक संयम है। जीवन में सही मार्ग पर चलने तथा आत्मा की शुद्धि के लिए संयम अत्यंत आवश्यक है।
महाआरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम
शाम के समय मंदिर में विशेष महाआरती का आयोजन किया गया। देर रात तक चले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में तंबोला प्रतियोगिता ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
श्रीफल साथी : मुकेश जैन, लार




