ललितपुर। दिगंबर जैन अटा मंदिर में पर्युषण महापर्व के दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि श्री विशद सागर जी महाराज ने कहा कि लोभ कषाय के अभाव में प्रकट होने वाली जीवन की पवित्रता ही शुचिता है। संतोष को जीवन में धारण करने से यह पवित्रता आती है।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति को जैसे-जैसे लाभ होता है, कई बार उसका लोभ भी बढ़ता जाता है। लोभ इच्छा और फिर तृष्णा में बदल जाता है। तृष्णा ऐसी अवस्था है जिसकी पूर्ण संतुष्टि संभव नहीं होती।

‘तन की पवित्रता बाहरी, सच्ची पवित्रता मन की’

मुनि विशद सागर जी ने कहा कि मनुष्य को सबसे अधिक ध्यान मन की शुद्धि पर देना चाहिए। तन की स्वच्छता बाहरी पवित्रता है, जबकि मन की पवित्रता व्यक्ति के विचार और भावों से जुड़ी है।

उन्होंने कहा कि सच्ची पवित्रता मन की होती है और यही जीवन में कल्याणकारी बनती है। उत्तम शौच धर्म व्यक्ति को लोभ और तृष्णा से मुक्त होकर संतोष एवं आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

तत्त्वार्थसूत्र वाचन के साथ हुई धर्मसभा

धर्मसभा की शुरुआत कविता जैन गौना के मंगलाचरण से हुई। मुनि संघ के सान्निध्य में गीतांशी जैन, पार्थवी जैन एवं सौम्या जैन ने तत्त्वार्थसूत्र का वाचन किया। अर्घ्य समर्पण का पुण्यार्जन कपूरचंद-सचिन जैन लागौन परिवार ने किया।

धर्मसभा का संचालन मंदिर प्रबंधक मनोज जैन बबीना ने किया। इस अवसर पर जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, आकाश जैन, अनिल जैन अंचल, शीलचंद अनौरा, सतीश नजा, अनीता मोदी सहित समाजजन उपस्थित रहे। मध्यान्ह में मुनि श्री ने तत्त्वार्थसूत्र के सूत्रों का विवेचन किया।

जिनालयों में सुबह से अभिषेक-शांतिधारा

पर्युषण के चलते नगर के अभिनंदनोदय तीर्थ, आदिनाथ जैन बड़ा मंदिर, नया मंदिर, बाहुबली नगर, नई बस्ती, आदिनाथ मंदिर, चंद्रप्रभु मंदिर डोढ़ाघाट, शांतिनगर, पार्श्वनाथ समवशरण मंदिर, पार्श्वनाथ कॉलोनी, ज्ञानोदय तीर्थ और एम्ब्रोशिया जैन मंदिर सहित विभिन्न जिनालयों में श्रद्धालु सुबह से अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा में सहभागिता कर रहे हैं।

‘संतोष रूपी जल से आत्मा को पवित्र करें’

पार्श्वनाथ जैन अटा मंदिर में मुनि श्री शिवसागर जी महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा हुई। उन्होंने कहा कि संतोष रूपी जल से अपनी आत्मा को पवित्र करने में ही सच्चा सुख है। शुचिता का धर्म व्यक्ति को आत्मिक शांति का बोध कराता है।

सायंकालीन आरती के बाद शास्त्रसभा में विद्वानों ने पर्युषण महापर्व की महत्ता और उत्तम शौच धर्म के स्वरूप को विस्तार से समझाया।

‘मूकमाटी’ नाटिका ने खींचा ध्यान

अभिनंदनोदय तीर्थ में वीरांगना अब्बक्का ग्रुप द्वारा आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के जीवन एवं कृति से प्रेरित ‘मूकमाटी’ नाटिका का मंचन किया गया। प्रस्तुति को उपस्थित समाजजनों ने सराहा।

नाटिका की संयोजना दीप्ति जैन, नेहा, सुरभि, दीपाली, आरती, कीर्ति एवं सुजाता जैन ने की।

संस्कारों के साथ प्रतिभा दिखा रहे बच्चे

नगर के पार्श्वनाथ जैन नया मंदिर, एम्ब्रोशिया कॉलोनी और पार्श्वनाथ कॉलोनी सहित विभिन्न स्थानों पर धार्मिक एवं प्रेरणादायी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें बच्चे उत्साह से हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ धर्म और संस्कारों से जुड़ रहे हैं।