ललितपुर। “नम्रता और प्रिय वचन मनुष्य के आभूषण हैं। जिसके हृदय में सत्य का वास है, उसके हृदय में परमात्मा का वास रहता है।” दशलक्षण महापर्व में उत्तम सत्य धर्म की व्याख्या करते हुए आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर जी महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि श्री विशद सागर जी महाराज ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि सत्य को सहन करना भी कठिन है, इसलिए सत्य को सही अर्थ में समझने की आवश्यकता है। मन में निश्चलता, पवित्रता और सद्भावना होनी चाहिए। सत्य की उपासना और असत्य का त्याग जीवन को आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ाता है।

‘जहां हित न हो, वहां मौन रहना उचित’

मुनि विशद सागर जी ने कहा कि सत्य वचन का पालन प्रत्येक परिस्थिति में विवेकपूर्वक करना चाहिए। जहां बोलने से धर्म की रक्षा और प्राणियों का उपकार होता हो, वहां आवश्यकता पड़ने पर बोलना चाहिए, लेकिन जहां अपनी बात से स्वयं या दूसरे का हित न हो, वहां मौन रहना उचित है।

उन्होंने कहा कि नीतिकारों ने सत्य को गले का आभूषण बताया है। सत्य से वाणी पवित्र होती है और सत्य पर सारे तप निर्भर हैं। सत्य की साधना व्यक्ति को आत्मिक उन्नति की ओर ले जाती है।

तत्त्वार्थ सूत्र का पाठ कर बालिकाओं ने की धर्म आराधना

धर्मसभा का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र के समक्ष गणमान्यजनों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। बालिका परी जैन, अवनी जैन और राखी जैन ने तत्त्वार्थ सूत्र का पाठ किया।

मंदिर प्रबंधक सिंघई मनोज जैन ने धर्मसभा का संचालन किया। दोपहर में मुनि विशद सागर जी ने तत्त्वार्थ सूत्र की विस्तृत व्याख्या कर श्रद्धालुओं को इसके सिद्धांतों का महत्व समझाया।

मुनिसुव्रतनाथ जैन मंदिर में अभिषेक-शांतिधारा

दयोदय पशु संरक्षण केंद्र गौशाला स्थित मुनिसुव्रतनाथ जैन मंदिर में श्रावकों ने भगवान के अभिषेक एवं शांतिधारा में सहभागिता कर धर्मलाभ लिया।

शांतिधारा का पुण्यार्जन ज्ञानचंद-संतोष जैन इमलिया, सुनील कामरा, आनंद चौधरी, अरविंद सिंघई, कल्लू जैन, महावीर कामरा, अनुराग जैन एवं अखिलेश जैन ने किया।

प्रतिभास्थली की बालिकाओं में धर्म साधना का उत्साह

सायंकाल प्रतिभास्थली की बालिकाओं ने भक्तिभाव से आरती में सहभागिता की। धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को लेकर बच्चों में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

भारत विकास परिषद की ओर से जैन नया मंदिर में ‘मोक्ष का रथ’ प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें डॉ. संजीव कर्डकी, अनुपम जैन, विकास जैन, सुनील जैन सहित समाजजन उपस्थित रहे।

सत्य के साथ करुणा और अहिंसा का होना जरूरी

सायंकालीन आरती के बाद शास्त्रसभा में विद्वानों ने उत्तम सत्य धर्म पर विचार रखे। वक्ताओं ने सत्य को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि वाणी में सत्य के साथ करुणा, अहिंसा, विवेक और जीवहित का भाव भी आवश्यक है। केवल शब्दों की तथ्यात्मक सत्यता नहीं, बल्कि उसके पीछे का भाव और उससे होने वाला हित-अहित भी विचारणीय है।

चातुर्मास से जिनालयों में हो रही धर्म प्रभावना

इन दिनों आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर जी महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि श्री विशद सागर जी महाराज एवं मुनि श्री शिवसागर जी महाराज के ससंघ चातुर्मास तथा नगर में विराजमान आर्यिका माताजी के प्रवचनों से दशलक्षण धर्म की प्रभावना हो रही है। आयोजनों को संपन्न कराने में नगर की विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ दिगंबर जैन पंचायत के पदाधिकारी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।