ललितपुर। जैन अटा मंदिर में पर्युषण पर्व के अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि विशदसागर महाराज ने कहा कि जीवन की यात्रा व्यक्ति को आत्मा के एकत्व की अनुभूति के साथ करनी चाहिए। एकत्व में शांति और आनंद है, जबकि अनेकत्व का भाव अशांति उत्पन्न करता है।

आकिंचन्य धर्म आत्मा की शरण

मुनिश्री ने कहा कि आकिंचन्य धर्म आत्मा की उस दशा का नाम है, जहां बाहरी वस्तुओं के साथ भीतर के संकल्प-विकल्पों को भी विश्राम मिलता है। केवल बाहरी परित्याग पर्याप्त नहीं है; मन में यदि ‘मैं’ और ‘मेरा’ का भाव बना रहता है तो आत्मा बोझिल होती है और मुक्ति की यात्रा आगे नहीं बढ़ती।

उन्होंने कहा कि अपने और पराए के भेद को समझकर निर्विकल्प, निर्बंध और एकांकी आत्मा की अनुभूति में उतरना ही साधना है। जैसे नदी बिना किसी की प्रतीक्षा किए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है, वैसे ही साधक को भी आत्मकल्याण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।

तत्वार्थसूत्र का वाचन

धर्मसभा के प्रारंभ में पाठशाला परिवार के कुनाल, सोनाली एवं महक ने तत्वार्थसूत्र का वाचन किया। अर्घ्य देवोदय तीर्थ परिवार के अंचल अध्यक्ष अनिल जैन द्वारा समर्पित किए गए तथा मंगलाचरण उपासना नजा ने प्रस्तुत किया। मध्यान्ह में मुनिश्री ने तत्वार्थसूत्र को विस्तार से समझाते हुए श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया।

नगर के जिनालयों में भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रम

नगर के अभिनंदनोदय तीर्थ, आदिनाथ बड़ा मंदिर, पार्श्वनाथ नया मंदिर, आदिनाथ मंदिर गांधीनगर, चंद्रप्रभु मंदिर डोडाघाट, शांतिनगर मंदिर, इलाइट जैन मंदिर, सिविल लाइन, बाहुबली नगर, पार्श्वनाथ कॉलोनी, एम्ब्रोशिया कॉलोनी, दयोदय प्राणी संरक्षण केंद्र स्थित मुनिसुव्रतनाथ मंदिर तथा ज्ञानोदय कॉलोनी स्थित मंदिर में श्रद्धालु पूजन-भक्ति के लिए पहुंच रहे हैं।

बच्चों के बालक-बालिका मंडलों ने आकर्षक झांकियां सजाईं, जिन्हें देखकर श्रद्धालुओं ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया। आदिनाथ मंदिर नई बस्ती में विद्यासागर पाठशाला, महिला मंडल ज्ञान इकाई एवं चेलना इकाई ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। पार्श्वनाथ नए मंदिर में पूर्णमति महिला मंडल द्वारा शोना टड़ैया, गुंजा जैन एवं राखी जैन के संयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए।

25 सितंबर को कलशाभिषेक और दिव्य यात्रा

जैन पंचायत के महामंत्री आकाश जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व के समापन पर 25 सितंबर को प्रातः 8 बजे अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्रपाल मंदिर में मुनि विशदसागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में कलशाभिषेक एवं प्रवचन होगा। सायंकाल नगर के जैन मंदिरों में कलशाभिषेक संपन्न होंगे।

एम्ब्रोशिया जैन मंदिर की प्रबंधक वीणा जैन ने बताया कि मध्यान्ह 2 बजे कॉलोनी में पहली बार श्रीजी की दिव्य यात्रा निकाली जाएगी। समाजजनों से धार्मिक आयोजन में सहभागी बनने का आग्रह किया गया है।