कुण्डलपुर। सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर की पावन धरा पर पूज्य बड़े बाबा के चरणों में निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज ने अपनी साधना एवं संयम परंपरा का निर्वहन करते हुए त्रैमासिक केशलोंच किया। मुनि श्री पवित्रसागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में यहां चातुर्मासिक धर्मप्रभावना के विविध आयोजन हो रहे हैं।

बड़े बाबा के चरणों में संपन्न हुए धार्मिक अनुष्ठान

प्रचार मंत्री जयकुमार जैन ‘जलज’ ने बताया कि प्रातः भक्तामर महामंडल विधान, पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांतिधारा, रिद्धि कलश एवं पूजन विधान संपन्न हुआ। शांतिधारा का वाचन मुनि श्री समतासागर महाराज ने किया।

प्रथम अभिषेक, शांतिधारा एवं रिद्धि कलश का सौभाग्य अमोलकचंद-लाभचंद, वैभव-तक्ष-रियांश जैन परिवार, दिल्ली; प्रभाकर-कविता-वृषभ-प्रज्वल परिवार, कर्नाटक तथा रमेशचंद्र-अनीता-विकास-मोहित जैन परिवार, सूरजमल विहार को प्राप्त हुआ।

केशलोंच है आत्मसंयम की विशिष्ट साधना

जैन मुनि परंपरा में केशलोंच तप, त्याग, सहनशीलता और शरीर के प्रति ममत्व के त्याग का प्रतीक माना जाता है। इस साधना में मुनिराज बिना किसी उपकरण के अपने हाथों से केशों का त्याग करते हैं। यह कठिन साधना धैर्य, वैराग्य और आत्मबल को दृढ़ करने का माध्यम है।

मुनि श्री की साधना ने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि सच्ची साधना बाहरी सुख-सुविधाओं में नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, इच्छाओं पर नियंत्रण और समभाव बनाए रखने में निहित है।

पूजा व्यवस्था में पुजारी परिवार की सेवाएं

पूज्य बड़े बाबा के चरणों में सेवा दे रहे पुजारी अनिलकुमार, विपिन, आदित्य, बालचंद, लालचंद, अनिकेत, अभिषेक एवं प्रकाशचंद सहित अन्य सेवाभावी जन हजारों श्रद्धालुओं के लिए अभिषेक एवं पूजन व्यवस्था में संलग्न रहे।

श्रीफल साथी : राजीव सिंघई कुण्डलपुर