कुंभोज। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद, कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील ने बताया कि 19 अक्टूबर को आचार्य श्री 108 चंद्रप्रभसागरजी महाराज का अवतरण दिवस एवं उनके शिष्य मुनि श्री 108 चंद्रकीर्तिजी महाराज का प्रथम दीक्षा दिवस मनाया जाएगा।

आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, महावीर दिगंबर जैन मंदिर, वीर सेवा दल, वीर महिला मंडल, जैन युवा मंच, विद्यासन्मतीदास चातुर्मास समिति 2026, त्यागी सेवा समिति तथा कुंभोज के श्रावक-श्राविकाएं आयोजन में सहयोग कर रहे हैं।

आचार्य श्री का संक्षिप्त जीवन परिचय

आचार्य श्री चंद्रप्रभसागरजी महाराज का पूर्वाश्रम नाम ब्रह्मचारी जिनेंद्र भूपाल आवटी रहा है। उनका जन्म 18 अक्टूबर 1980 को मौजे डिग्रज, तहसील मिरज, जिला सांगली में हुआ।

उन्होंने 6 फरवरी 2002 को भोपाल में आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज से ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया। इसके बाद 21 फरवरी 2008 को हेरले में ऐलक दीक्षा तथा 25 जून 2009 को बाहुबली, कोल्हापुर में दिगंबर दीक्षा ग्रहण की। उनके दीक्षा गुरु आचार्य श्री सन्मतिसागरजी महाराज हैं।

29 मार्च 2015 को आष्टा, सांगली में चतुर्विध संघ के सान्निध्य में उन्हें आचार्य पद प्रदान किया गया। वर्तमान वर्ष 2026 में उनका चातुर्मास कुंभोज में चल रहा है।

दीक्षा दिवस मनाएंगे मुनि चंद्रकीर्तिजी

मुनि श्री 108 चंद्रकीर्तिजी महाराज का पूर्वाश्रम नाम राहुल रायगोंडा कनवाडे है। उनका जन्म 1 मार्च 1985 को आळते में हुआ। उन्होंने बी.ए. तक शिक्षा प्राप्त की।

उन्होंने 30 अक्टूबर 2006 को आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज से ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया। विजयादशमी, 2 अक्टूबर 2025 को चिपरी स्थित आचार्य श्री चिकित्सालय में उन्होंने मुनि दीक्षा ग्रहण की। वर्ष 2026 में उनका द्वितीय चातुर्मास कुंभोज में चल रहा है।

तप-साधना और पदयात्रा का उल्लेख

आयोजकों के अनुसार मुनि श्री चंद्रकीर्तिजी ने ब्रह्मचर्य अवस्था में 450 निर्जल उपवास किए हैं। उन्होंने वर्ष 2012 में सदलगा से सम्मेद शिखरजी तक पदयात्रा भी की थी। उनके तप एवं संयममय जीवन को श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया।

श्रीफल साथी : अभिषेक अशोक पाटील, कोल्हापुर