कुचामन सिटी। सब्जी मंडी स्थित नई नासियां जी में दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत उत्तम तप धर्म श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र देव का कलशाभिषेक एवं पूजन कर धर्मलाभ लिया।

तप आत्मशुद्धि और कर्म निर्जरा का मार्ग

कार्यक्रम में बताया गया कि तप केवल शरीर को कष्ट देने का नाम नहीं, बल्कि मन को वश में रखते हुए इच्छाओं पर नियंत्रण और आत्मा की शुद्धि की साधना है। तप, संयम और साधना के माध्यम से श्रद्धालु आत्मकल्याण की दिशा में अग्रसर होते हैं।

तप धर्म के महत्व को इन पंक्तियों के माध्यम से स्मरण किया गया—

“तप चौदह प्रकार का, इन्द्रिय के वश में है।

इसे नित्य दृढ़ धारण करो, निज सकल कर्मों का क्षय करो।”

अभिषेक, शांतिधारा और आरती

भगवान जिनेंद्र देव का कलशाभिषेक एवं पूजन श्रद्धापूर्वक हुआ। शांतिधारा के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। किरण झांझरी ने बताया कि सुनील भैया, खरगापुर द्वारा देव-शास्त्र-गुरु पूजा एवं दशलक्षण विधान विधिपूर्वक कराया गया।

आरती का सौभाग्य पालड़ी वाले श्रद्धालु परिवार को प्राप्त हुआ। समाजजनों ने उत्साह के साथ धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया।

तेला उपवास की अनुमोदना

सोनू झांझरी के तेला उपवास के अवसर पर पुरस्कार वितरण का सौभाग्य भी सोनू झांझरी को प्राप्त हुआ। समाजजनों ने तप की अनुमोदना करते हुए तपस्वी का उत्साहवर्धन किया।

शांतिधारा का सौभाग्य

प्रथम शांतिधारा का सौभाग्य ओमप्रकाश-सुनील कुमार-अशोक कुमार परिवार को प्राप्त हुआ। द्वितीय शांतिधारा का सौभाग्य दीपक-उजास-मनन-गीतांश-अर्णव झांझरी परिवार, पालड़ी वालों को मिला।

प्रेषक : किरण झांझरी