इंदौर। इस वर्ष 17 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय पुरातत्व दिवस मनाया जा रहा है। प्रति वर्ष अक्टूबर माह के तृतीय शनिवार को यह मनाया जाता है। अतः इसे लेकर कोई तारीख तय नहीं है। अक्सर लोग इसे 18 अप्रैल को मनाए जाने वाले 'विश्व धरोहर दिवस' के साथ जोड़कर भ्रमित हो जाते हैं जबकि धरोहर दिवस ऐतिहासिक इमारतों और धरोहरों के संरक्षण के लिए समर्पित है, जबकि इस दिन को पुरातत्व विज्ञान और अतीत की खोज की प्रक्रिया के उत्सव के रूप में मनाया जाता। भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय भी इस अवसर पर पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विरासत पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है। निर्ग्रन्थ आर्केलाजी सर्वे आफ इंडिया इंदौर संभाग के पुरातत्व संयोजक एवं वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि हमारा ज्ञात पुरातत्व अतीत का दर्पण, वर्तमान की धरोहर और भविष्य की विरासत प्राचीन प्रतिमाएँ शिलालेख और अन्य अवशेष केवल पत्थर नहीं, इतिहास की बोलती हुई गाथाएँ हैं। अपनी धरोहर को जानें, इतिहास को पहचानें और संस्कृति को सुरक्षित रखें। प्राप्त पुरावशेषों का अध्ययन और इतिहास की कड़ी को जोड़ना इस पुरातत्व दिवस का मुख्य मुख्य उद्देश्य है।

इतिहास

इसकी शुरुआत और पहला आयोजन वर्ष 2011 में सिर्फ अमेरिका में ही हुआ था क्योंकि इसकी शुरुआत अमेरिकी पुरातत्व संस्थान ने देश में पुरातत्व सामग्री के प्रति जागरूकता के लिए की गई थी। बाद में अन्य देशों ने भी इसके प्रति उत्सुकता दिखाई अतः वर्ष 2013 में इसमें अंतराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाने लगा।

भारत की महत्वपूर्ण खोजें

सिंधु घाटी सभ्यता की खोज (1921-1922) यह भारत के इतिहास की सबसे बड़ी खोज मानी जाती है। इससे पहले माना जाता था कि भारतीय इतिहास वैदिक काल से शुरू हुआ था, लेकिन इस खोज ने भारत के इतिहास को 2,000 वर्ष से भी अधिक पीछे धकेल दिया।ऐसी कई महत्वपूर्ण खोज हुई है। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो (1921) लोथल (गुजरात), राखीगढ़ी (हरियाणा), पाकरी बरवाडीह मेगालिथ स्थल (झारखंड), लोथल (गुजरात), राखीगढ़ी (हरियाणा), कीझाड़ी (तमिलनाडु), सिनौली (उत्तर प्रदेश) बांधवगढ़ की गुफाएं और मंदिर (मध्य प्रदेश), भीमबेटका (मध्य प्रदेश), धोलावीरा (गुजरात) खारवेल के हाथी गुफा के ब्राम्ही शिलालेख, सम्राट अशोक के राजकीय शिलालेख की खोजें पुरातत्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

तीर्थ जीर्णोद्धार पत्रिका का होगा विमोचन

भारत वर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष टीके वेद एवं प्रदेश अध्यक्ष देवेन्द्र सेठी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय पुरातत्व दिवस के अवसर पर चतुर्थ पट्टाचार्य प्राकृताचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में प्राचीन तीर्थ जीर्णोद्धार पत्रिका का विमोचन प्राप्त 9 बजे किया जाएगा। यह पत्रिका देश विदेश में फैले जैन पुरातत्व एवं खोज की प्रमाणिकता से जानकारी देने वाली देश की एक मात्र पत्रिका है जिसमें सचित्र और अत्यंत उपयोगी जानकारियां प्रति माह प्रकाशित की जाती है। श्रुत संवर्ध्दनी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष इंद्रकुमार सेठी, महासभा के महामंत्री कैलाश लुहाड़िया, कार्याध्यक्ष तल्लीन बड़जात्या, कोषाध्यक्ष राकेश पाटनी, इंदौर संभाग अध्यक्ष पवन पाटोदी एवं इंदौर क्षेत्र के मंदिर संयोजक आदि लोग इस कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।