
यह निर्णय अहिंसक और अल्पसंख्यक जैन समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला भी है। अतः इस निर्णय को तुरंत वापस लिया जाए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रतिनिधिमंडल ने इंदौर के सांसद शंकर लालवानी से भी भेंट कर उन्हें निर्णय के विरोध एवं निर्णय वापस लेने के संबंध में एक ज्ञापन भी दिया है। पाटोदी ने समग्र जैन समाज से आह्वान किया कि शिखरजी सहित सभी पुरातन जैन तीर्थ हमारी संस्कृति की ऐतिहासिक धरोहर हैं, इनसे ही हमारी जैन संस्कृति की प्राचीनता और इतिहास का पता चलता है।
उनकी रक्षा एवं संरक्षण करना जिन शासन की रक्षा करना है। इसलिए तीर्थों की रक्षा एवं संरक्षण के लिए समग्र जैन समाज संगठित बनें, संगठित रहें और तीर्थों की रक्षा के लिए किए जा रहे प्रयास और आंदोलन को सफल बनांए। युवा प्रकोष्ठ प्रवक्ता राजेश जैन दद्दू ने कहा कि हर घर से पुरुष, महिलाएं, बच्चे और समाज के जितने भी संगठन, सोशल ग्रुप, महिला संगठन, महिला मंडल हैं, वे इस संदर्भ में रविवार को निकलने वाली रैली में सम्मिलित होकर शासन तक अपनी आवाज पहुंचाएं।
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