कलिजरा, बांसवाड़ा। वागड़ की धर्मधरा कलिजरा में पहली बार आर्यिका संघ के ऐतिहासिक चातुर्मास का शुभारंभ सोमवार को भव्य कलश स्थापना के साथ हुआ। विधि-विधान से कलश स्थापना संपन्न होते ही पूरा पांडाल ‘जय जिनेन्द्र’ और धर्म जयघोष से गूंज उठा। इस आयोजन के साथ कलिजरा ने आध्यात्मिक इतिहास में नया अध्याय जोड़ा।
ध्वजारोहण से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ बाहुबली परिसर में ध्वजारोहण के साथ हुआ। ध्वजारोहण का पुण्यलाभ धनपाल पचोरी (नौगामा) को प्राप्त हुआ। इसके बाद आचार्य श्री 108 विभव सागर जी महाराज की परम प्रभावक शिष्या, जिनवाणी पुत्री आर्यिका सिद्ध श्री, आर्यिका संघ श्री एवं आर्यिका सभा श्री के 10वें पावन वर्षायोग (चातुर्मास) का दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुभारंभ हुआ। दीप प्रज्ज्वलन पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया, पूर्व जिलाध्यक्ष चांदमल जैन, प्रधान सुभाषजी तथा अब्दुल गफ्फार ने किया। मंगलाचरण ईशानवी एवं फैनी द्वारा प्रस्तुत किया गया।
धार्मिक प्रस्तुतियों से भक्तिमय हुआ परिसर
कलश स्थापना से पूर्व बालिका मंडल, महिला मंडल एवं नवयुवक मंडल द्वारा आकर्षक धार्मिक प्रस्तुतियां दी गईं। प्रस्तुतियों से पूरा परिसर भक्तिभाव से सराबोर हो गया।
नौगामा, बागीदौरा, बड़ोदिया, परतापुर, घाटोल, तलवाड़ा, अरथूना, बांसवाड़ा, सज्जनगढ़, कुशलगढ़, सागवाड़ा सहित मध्यप्रदेश के इंदौर एवं दक्षिण क्षेत्र से आए श्रद्धालुओं ने आर्यिका संघ के चरणों में श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु
समाज अध्यक्ष रतनपाल दोसी ने बताया कि राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु चातुर्मास कलश स्थापना के साक्षी बनने पहुंचे। बाहर से आए अतिथियों का सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से आत्मीय स्वागत एवं सत्कार किया गया। कार्यक्रम का संचालन भैयाजी एवं संजीव धनावत ने किया।
धर्म के भाव जागृत होना ही सच्चे धर्म की पहचान
आर्यिका सिद्ध श्री ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में कहा कि “मन में धर्म के भाव जागृत होना ही सच्चे धर्म की पहचान है।” उन्होंने कहा कि चातुर्मास का उद्देश्य धन अर्जित करना नहीं, बल्कि धर्म का अर्जन करना है। कलश केवल एक पात्र नहीं, बल्कि मंगल, पवित्रता और आत्मजागरण का प्रतीक है। जिस प्रकार कलश मंगल एवं पवित्रता का प्रतीक है, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन को सदाचार, संयम और धर्म के प्रकाश से आलोकित करना चाहिए।
प्रत्येक घर कलशमय और परिवार धर्ममय बने
आर्यिका सिद्ध श्री ने कहा कि कलश स्थापना के माध्यम से श्रद्धालुओं ने साधु-संघ को अपने बीच विराजमान होने का आग्रह किया है। प्रत्येक घर कलशमय बने, प्रत्येक परिवार धर्ममय बने और प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में आत्मकल्याण की भावना जागृत हो, यही चातुर्मास का वास्तविक उद्देश्य है। उन्होंने कलिजरा के नवयुवकों की सेवा, अनुशासन और उत्साह की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वागड़ की धर्मधरा पर आयोजित यह चातुर्मास पूरे भारत में ऐतिहासिक उदाहरण बनेगा।
कलश मंगल और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक
आर्यिका सभा श्री ने कहा कि प्रत्येक घर में कलश का विशेष धार्मिक महत्व है। कलश समृद्धि, मंगल और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है। जिस परिवार में धर्म, संस्कार और श्रद्धा का कलश स्थापित होता है, वहां सुख-समृद्धि और शांति का वातावरण बना रहता है।
इन परिवारों को मिला कलश स्थापना का पुण्यलाभ
कलश स्थापना का पुण्यलाभ क्रमशः इन परिवारों को प्राप्त हुआ—
- प्रथम कलश: गांधी बदामीलाल कुशलजी परिवार।
- द्वितीय कलश: गांधी पंकज कुमार केसरीमल परिवार।
- तृतीय कलश: दोसी नगीनलाल किशनलाल परिवार।
- चतुर्थ कलश: रतनपाल मोतीलाल दोसी परिवार।
- पंचम कलश: सुशील रतनपाल घोड़ा परिवार।
नृत्य प्रस्तुतियों ने मोहा मन
कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं, महिलाओं एवं नन्हे-मुन्ने बच्चों ने एकल एवं समूह नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। पूरे आयोजन में धर्म, संस्कृति, भक्ति और सामाजिक सहभागिता का अद्भुत संगम देखने को मिला। भव्य कलश स्थापना के साथ शुरू हुआ यह ऐतिहासिक चातुर्मास कलिजरा के धार्मिक इतिहास में विशेष अध्याय के रूप में दर्ज हुआ।



