झुमरीतिलैया। दशलक्षण पर्युषण महापर्व के पांचवें दिन जैन धर्मावलंबियों ने उत्तम सत्य धर्म की आराधना की। नगर में धर्म और ज्ञान की प्रभावना कर रहे मुनि श्री 108 सुयश सागर जी महाराज ने धर्मसभा में कहा कि “सत्य जहां खिल जाता है, वहां भगवान मिल जाते हैं। सत्यमेव जयते केवल कहने का नहीं, जीवन में आचरण का विषय है।”
मुनि श्री ने कहा कि सत्य मनुष्य के हृदय में विद्यमान है, जिसे अंतरंग अनुभूति से समझा जा सकता है। भगवान की देशना सुनने का अवसर भी पुण्य के उदय से मिलता है।
‘जिस वचन से किसी को हानि न पहुंचे, वही सत्य’
मुनि सुयश सागर जी ने कहा कि जैन दर्शन अहिंसा के साथ सत्य की व्याख्या करता है। ऐसा सत्य बोलना चाहिए जिससे दूसरे जीव को हानि न पहुंचे। जहां क्रोध, मान, माया और लोभ प्रभावी होते हैं, वहां सत्य धर्म का वास्तविक स्वरूप प्रकट नहीं हो पाता। इन कषायों के अभाव में सत्य की अनुभूति होती है।
उन्होंने कहा कि विद्या का वास्तविक मंदिर वही है, जहां शिक्षा के साथ नैतिकता और धार्मिकता का पाठ भी पढ़ाया जाता है।
‘सत्य परेशान हो सकता है, पर हारता नहीं’
मुनि श्री ने भगवान राम के वनवास का उदाहरण देते हुए सत्य और वचनबद्धता का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को स्पष्टवादी होना चाहिए। सत्य की परीक्षा होती है, उसे दबाने और परेशान करने का प्रयास भी हो सकता है, लेकिन अंततः सत्य की ही विजय होती है।
उन्होंने कहा कि शब्दों का विष बड़े संघर्ष का कारण बन सकता है, इसलिए वाणी में संयम और सत्यता आवश्यक है। संयमित वाणी व्यक्ति के जीवन और संबंधों को बेहतर दिशा देती है।
संपत्ति और सत्ता क्षणभंगुर, सम्यक ज्ञान की ओर बढ़ें
मुनि सुयश सागर जी ने कहा कि संपत्ति, संबंध और सत्ता स्थायी नहीं हैं। अस्थायी को शाश्वत मान लेने से व्यक्ति दुखी होता है। जीवन में सम्यक ज्ञान का सूर्य उदय होना सत्य को समझने की दिशा है। जिसने सत्य के स्वरूप को समझा, वही उसकी साधना की ओर आगे बढ़ता है।
बड़ा मंदिर में अभिषेक और महाशांतिधारा
बड़ा मंदिर में मूलनायक भगवान पारसनाथ के प्रथम कलश एवं महाशांतिधारा का पुण्यार्जन जयकुमार-सुमित जैन सेठी परिवार ने किया।
श्रीजी का विहार कराकर पांडुकशिला पर पद्मप्रभु भगवान को विराजमान करने, प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा का पुण्यार्जन विजय-विकास-विवेक जैन सेठी परिवार एवं आरजव जैन छाबड़ा को प्राप्त हुआ।
भगवान महावीर की हुई महाशांतिधारा
पंडाल परिसर में भगवान महावीर स्वामी के श्रीविहार एवं प्रथम अभिषेक का पुण्यार्जन जयकुमार-सुमित जैन सेठी एवं सुशील-शोभा जैन पांड्या परिवार ने किया।
भगवान महावीर स्वामी की महाशांतिधारा का पुण्यार्जन अशोक-अजय-अमित-वैभव जैन सेठी परिवार तथा हजारीमल-नरेश-ऋषि जैन कासलीवाल परिवार को मिला।
नया मंदिर, पानी टंकी रोड में भगवान महावीर की शांतिधारा का पुण्यार्जन सुशीला देवी-संदीप-आशीष-संजय जैन सेठी परिवार एवं हनुमान-नवीन-प्रवीण जैन पाटनी परिवार ने किया। भगवान आदिनाथ की वेदी पर शांतिधारा का पुण्यार्जन पारस जैन सेठी परिवार एवं अमित जैन-आरजव छाबड़ा परिवार को प्राप्त हुआ।
पाठशाला के बच्चों ने दिखाई धार्मिक प्रतिभा
इससे पूर्व रात्रि में विद्यासागर पाठशाला के बच्चों के लिए प्रश्नमंच, एक मिनट सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। विजेताओं को सुरेश झांझरी एवं आयुषी जैन झांझरी ने सम्मानित किया।
जैन समाज के मीडिया प्रभारी नवीन जैन एवं राजकुमार अजमेरा ने बताया कि रात्रि में बिट्टू दीदी के प्रवचन, भव्य आरती और गुरु मुख से णमोकार चालीसा के बाद नन्हे-मुन्ने बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।




