झुमरीतिलैया। श्री दिगंबर जैन मंदिर में प्रातः देवाधिदेव श्री 1008 चंद्रप्रभु भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं भव्य पूजन संपन्न हुआ। इसके पश्चात सोलहकारण व्रत की आराधना कर रहीं प्रियंका जैन छाबड़ा एवं प्रेम जैन झांझरी की तप-साधना की अनुमोदना की गई।
साधना से आत्मशुद्धि का मार्ग
जैन संत मुनि श्री 108 सुयशसागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 कौशल्यसागर जी महाराज ने कहा कि सोलहकारण व्रत जैन धर्म में अत्यंत पुण्यकारी साधना है। यह साधक को आत्मशुद्धि, संयम, त्याग और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ाता है।
मुनिश्री ने कहा कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई साधना जीवन में धर्म के प्रति दृढ़ता उत्पन्न करती है। उन्होंने दोनों व्रतधारियों को मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए उनकी तपस्या की सराहना की।
समाज ने की तपस्या की अनुमोदना
जैन समाज एवं विरागोदय वर्षायोग समिति के श्रद्धालुओं ने व्रतधारियों की धर्मनिष्ठा, संयम और त्याग की अनुमोदना की। समाजजनों ने कहा कि ऐसी साधनाएं समाज में धर्म, संस्कार और त्याग की भावना को सुदृढ़ करती हैं।
क्षमावाणी पर मांगी परस्पर क्षमा
पूर्व संध्या में क्षमावाणी पर्व पर जैन समाज पदाधिकारियों एवं विरागोदय वर्षायोग समिति के संयोजकों ने गुरुदेव, सोलहकारण एवं दशलक्षण व्रतधारियों तथा समाजजनों से हाथ जोड़कर क्षमा याचना की। उन्होंने कहा कि कार्यों अथवा जाने-अनजाने हुई किसी भी भूल के लिए सभी समाजबंधु उन्हें क्षमा करें।
मुनि सुयशसागर जी महाराज से मंत्रित लौंग की माला धारण करने का सौभाग्य विजय कुमार तथा विनीत-विवेक जैन छाबड़ा परिवार को प्राप्त हुआ। मीडिया प्रभारी राजकुमार जैन अजमेरा एवं नवीन जैन ने भी सभी से उत्तम क्षमा याचना की।
कार्यक्रम में सहभागिता
क्षमावाणी अवसर पर रौनक जैन कासलीवाल, शैलेश जैन छाबड़ा, सिद्धांत जैन सेठी, राहुल जैन छाबड़ा, संजय जैन छाबड़ा, सौरभ जैन लुहाड़िया, विकास जैन सेठी, लोकेश जैन पाटोदी, जोंटी जैन काला, प्रशम जैन सेठी, ईशान जैन सेठी एवं मनीष जैन गंगवाल सहित विरागोदय वर्षायोग समिति के संयोजक एवं समाजजन उपस्थित रहे।
श्रीफल साथी : राजकुमार जैन अजमेरा




