झुमरीतिलैया (कोडरमा)। जैन धर्म के महान पर्व दशलक्षण पर्युषण के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी का पर्व मुनि श्री 108 सुयशसागर जी महाराज के सान्निध्य में भक्ति, उत्साह और धर्मप्रभावना के साथ मनाया गया। बड़ा जैन मंदिर, डॉक्टर गली से ऐतिहासिक नगर भ्रमण शोभायात्रा निकाली गई।
रथ में विराजमान हुए वासुपूज्य भगवान
भगवान वासुपूज्य को संजय-ममता जैन सेठी परिवार द्वारा रथ में विराजमान किया गया। रथ में सारथी की भूमिका ललित-सृष्टि जैन अजमेरा, हजारीबाग एवं कुबेर सुरेंद्र जैन काला ने निभाई।
शोभायात्रा में रथ, पालकी, घोड़े, बग्घियां, चौपारण बैंड, नगाड़ा बैंड, तिलैया का शब्बीर बैंड, ताशा पार्टी, संगीतकार वाहन, झंडे-बैनर तथा विरागोदय साधना शिविर के लगभग 101 शिविरार्थी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। महिलाएं, पुरुष एवं बच्चे केसरिया एवं श्वेत वस्त्रों में पैदल चल रहे थे।
45 व्रतधारियों का सम्मान
शोभायात्रा में सभी 45 दशलक्षण व्रतधारियों का स्वागत-अभिनंदन किया गया और उन्हें घोड़ा-बग्घी वाहनों में विराजमान कराया गया। मार्ग में अनेक स्थानों पर तोरण द्वार बनाए गए तथा श्रद्धालुओं ने भगवान एवं गुरुदेव की आरती की।
भजन सम्राट सुबोध गंगवाल के भजनों ने शोभायात्रा को भक्तिमय बना दिया। मुनि सुयशसागर महाराज के जयकारों से नगर गूंज उठा। शोभायात्रा नया मंदिर, पानी टंकी रोड से होते हुए पुनः बड़ा जैन मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई।
आत्मा में लीन होना ही ब्रह्मचर्य धर्म
प्रातः श्रद्धालुओं ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की। मुनि सुयशसागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि आत्मा में लीन हो जाना ही ब्रह्मचर्य धर्म है। जब मनुष्य अपने आप में लीन होता है और मन में विकृति नहीं रहती, तब साधना की परम अनुभूति होती है।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मचर्य वासना से नहीं, साधना से सिद्ध होता है। जीवन को भोग से योग की ओर ले जाना ही श्रेष्ठ साधना है। मुनिश्री ने ब्रह्मचर्य के पथ पर चलने के लिए स्वस्थ मानसिकता, इंद्रिय नियंत्रण, अच्छी संगति एवं ईश्वर भक्ति को आवश्यक बताया।
निर्वाण लाडू और अभिषेक-शांतिधारा
अनंत चतुर्दशी पर भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में निर्वाण लाडू अर्पित किए गए। निर्वाण लाडू अर्पण का सौभाग्य अजय-अलका जैन सेठी परिवार सहित दशलक्षण एवं रत्नत्रय व्रतधारी परिवारों को प्राप्त हुआ।
नया मंदिर में महाशांतिधारा का पाठ हुआ। मूलनायक भगवान महावीर का प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा संदीप, संजय, आशीष एवं प्रीति जैन सेठी परिवार ने की। भगवान आदिनाथ की शांतिधारा प्रदीप-पीयूष जैन छाबड़ा परिवार ने की। शांतिनाथ भगवान के कलश का सौभाग्य हनुमान जैन पाटनी परिवार को मिला।
भगवान मुनिसुव्रतनाथ की शांतिधारा राशिका जैन काला परिवार तथा पार्श्वनाथ भगवान की शांतिधारा अजय-कुणाल जैन काला परिवार ने की। बड़ा मंदिर में पार्श्वनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा राहुल, शशि, रितेश जैन छाबड़ा परिवार एवं दीपक जैन रावका को प्राप्त हुई।
कार्यक्रम स्थल पर स्वर्ण कलश से प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा सुरेश-पंकज जैन रांची, मुन्ना जैन बाकलीवाल, अशोक-विनोद-अर्हम-कथान्स जैन अजमेरा, विजय जैन कासलीवाल तथा दिलीप-नीलिमा-अतिवीर जैन ठोलिया परिवार सहित व्रतधारी श्रद्धालुओं द्वारा की गई।
विशेष पुण्यार्जन और सहयोग
मंत्रित लौंग की माला एवं चांदी की माला का सौभाग्य कैलाशचंद, सुशीला देवी, संदीप एवं राशिका जैन काला, विजयनगर (असम) परिवार को प्राप्त हुआ। समाजजन बैंड-बाजे के साथ परिवार को उनके निवास तक पहुंचे।
कार्यक्रम संयोजन में विरागोदय वर्षायोग समिति 2026, श्री दिगंबर जैन समाज के पदाधिकारी, महिला समाज, जैन युवक समिति तथा शोभायात्रा संचालक समिति का विशेष सहयोग रहा। पार्षद पिंकी जैन, समाज के मीडिया प्रभारी राजकुमार जैन अजमेरा एवं नवीन जैन ने सभी व्रतधारियों की तप-साधना की अनुमोदना कर शुभकामनाएं दीं।
एक नजर में
बड़ा जैन मंदिर से वासुपूज्य भगवान की भव्य शोभायात्रा निकली।
45 दशलक्षण व्रतधारियों का सम्मान किया गया।
लगभग 101 शिविरार्थी शोभायात्रा का विशेष आकर्षण रहे।
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर मुनि सुयशसागर महाराज ने प्रवचन दिया।
वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडू अर्पित हुए।
पोल : धार्मिक शोभायात्राओं से समाज को सबसे अधिक क्या प्रेरणा मिलती है?
धर्म, एकता और संस्कारों का संदेश
नई पीढ़ी की धार्मिक सहभागिता
राजकुमार अजमेरा




