जयपुर। जनकपुरी-ज्योतिनगर स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर में चातुर्मासरत आध्यात्मयोगी आचार्य श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज के सान्निध्य में प्रतिदिन रत्नकरण्ड श्रावकाचार का वाचन एवं स्वाध्याय कराया जा रहा है। चातुर्मास के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु नियमित रूप से स्वाध्याय एवं धार्मिक गतिविधियों में सहभागिता कर रहे हैं।

सच्चे देव, शास्त्र और गुरु का स्वरूप

चतुर्मास मुख्य संयोजक पदम जैन बिलाला ने बताया कि बुधवार को स्वाध्याय के दौरान आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को सच्चे देव, शास्त्र और गुरु के स्वरूप की व्याख्या की।

आचार्यश्री ने कहा कि जो राग-द्वेष से रहित, वीतराग और सर्वज्ञ परमात्मा हैं, वही सच्चे देव हैं। जिनेन्द्र भगवान की वाणी के माध्यम से आत्मकल्याण और मोक्ष का मार्ग बताने वाला ही सच्चा शास्त्र है। वहीं जो स्वयं संयम और आत्मसाधना के मार्ग पर चलकर जीवों को मोक्षमार्ग की प्रेरणा दें, वही सच्चे गुरु हैं।

भक्तामर दीप अर्चना में उमड़ा भक्तिभाव

चतुर्दशी की शाम मंदिर परिसर में भक्तामर दीप अर्चना का आयोजन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ किया गया। इसके पश्चात चातुर्मास कलश के समक्ष पखवाड़े में सर्वाधिक जाप करने वाले श्रद्धालुओं का उत्साहवर्धन किया गया।

जाप में प्रथम स्थान अनिता बिंदायक्या, द्वितीय पुष्पा बिलाला तथा तृतीय स्थान शकुन्तला बिंदायक्या ने प्राप्त किया।

आगामी धार्मिक आयोजन

चातुर्मास के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया गया कि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस, 18 अगस्त को भगवान नेमिनाथ जन्म एवं तप कल्याणक तथा 19 अगस्त को भगवान पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक संघ के सान्निध्य में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा।

प्रतिदिन हो रही धर्माराधना

चातुर्मास के दौरान मंदिर परिसर में प्रतिदिन श्रद्धालु स्वाध्याय, जाप एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। आचार्यश्री के सान्निध्य में चल रही धार्मिक गतिविधियां श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, संयम और आत्मकल्याण की दिशा में प्रेरित कर रही हैं।