जयपुर। जनकपुरी-ज्योतिनगर स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री 108 आदित्यसागरजी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में आयोजित श्री सहस्रकूट जिनालय महामस्तकाभिषेक महोत्सव के अंतर्गत गुरुवार को श्री जिनसहस्रनाम विधान में 200 अर्घ्य समर्पित किए गए। इसके साथ ही विधान में अब तक कुल 900 अर्घ्य अर्पित हो चुके हैं।

श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ श्रीजी की आराधना कर धर्मलाभ प्राप्त किया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान इंद्रों द्वारा आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट की क्रियाएं भी संपन्न की गईं।

इंद्रों ने निभाई प्रमुख भूमिका

विधान में सौधर्म इंद्र के रूप में जिनेंद्र-प्रियंका बाकलीवाल, कुबेर के रूप में महेंद्र जैन तथा यज्ञनायक के रूप में महेंद्र-मंजु कासलीवाल ने धार्मिक क्रियाओं में सहभागिता की।

आहार दान का महत्व बताया

प्रवचन में आचार्य श्री ने आहार दान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुयोग्य पात्र को विधिपूर्वक आहार देना पुण्यकारी दान है। उन्होंने दान के भाव, पात्र की योग्यता और विनयपूर्ण समर्पण का महत्व समझाया।

शनिवार को हवन, रविवार को महामस्तकाभिषेक

महोत्सव के आगामी कार्यक्रमों में शनिवार को विश्व शांति एवं सर्वकल्याण की मंगल भावना के साथ हवन-यज्ञ आयोजित किया जाएगा। रविवार, 18 अक्टूबर को श्री सहस्रकूट जिनालय की 1008 जिन प्रतिमाओं का प्रथम ऐतिहासिक महामस्तकाभिषेक एवं दीक्षा दिवस महोत्सव आयोजित होगा।

श्रेष्ठी पदम जैन बिलाला ने उपस्थित श्रद्धालुओं को महामस्तकाभिषेक के पात्रों के चयन और आयोजन की प्रक्रिया की जानकारी दी।

फिल्म प्रदर्शन और सायंकालीन आयोजन

महोत्सव के अंतर्गत शुक्रवार को दिगंबर जैन महासमिति महिला अंचल राजस्थान के सौजन्य से तमिलनाडु के जैन मंदिरों पर आधारित विशेष फिल्म प्रदर्शित की जाएगी। इसके माध्यम से श्रद्धालुओं को दक्षिण भारत के जैन मंदिरों की धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं से परिचित होने का अवसर मिलेगा।

सायंकाल मंदिर परिसर में श्रीजी की आरती, गुरु भक्ति और आचार्य श्री के आशीर्वचन हुए। विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों से मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर है।

श्रीफल साथी : पदम जैन बिलाला, जयपुर