जयपुर। श्री दिगंबर जैन मंदिर, जनकपुरी-ज्योतिनगर में रविवार को क्षमावाणी पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सायंकाल भगवान नेमिनाथ को पांडाल में पांडुकशिला पर विराजित कर जयकारों के साथ भव्य मंगल कलशाभिषेक आयोजित किया गया।

आचार्य आदित्यसागर महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता की।

क्षमा को बताया धर्म का मूल आधार

आचार्य आदित्यसागर महाराज ने मंगल प्रवचन में क्षमावाणी पर्व की महत्ता बताई। उन्होंने क्षमा को धर्म का मूल आधार बताते हुए कहा कि क्षमा भाव जीवन को सुखमय और पापमुक्त बनाने का मार्ग है।

18 अक्टूबर को होगा 1008 जिनेंद्रों का अभिषेक

श्रेष्ठी पदम जैन बिलाला ने बताया कि तीर्थंकर नेमिनाथ के आशीर्वाद एवं आचार्यश्री के मार्गदर्शन में मंदिर में वर्ष 2018 में स्थापित सहस्त्रकूट जिनालय में विराजित 1008 जिनबिंबों का अभिषेक एवं शांतिधारा कराने का संकल्प लिया गया है।

यह आयोजन 11 से 18 अक्टूबर तक होने वाले सहस्रनाम विधान के अंतर्गत 18 अक्टूबर को आचार्य आदित्यसागर महाराज के सान्निध्य में होगा। इसी दिन महामस्तकाभिषेक तथा आचार्यश्री के दीक्षा दिवस का भव्य आयोजन भी प्रस्तावित है।

श्रीफल अर्पण कर लिया आशीर्वाद

समाज के पदाधिकारियों और गणमान्यजनों ने आचार्यश्री के चरणों में श्रीफल अर्पित कर आगामी विधान एवं महामस्तकाभिषेक आयोजन के लिए आशीर्वाद लिया।

कार्यक्रम में श्रेष्ठी अशोक चांदवाड़, चेतन छाबड़ा, पार्षद प्रेमचंद सहित विशिष्ट अतिथियों का सम्मान किया गया। दशलक्षण पर्व के लिए संस्थान से पधारीं विदुषी आशिका एवं विदुषी अनुषी का मंगल अभिनंदन किया गया। मंदिर की व्यवस्थाओं में सहयोग करने वाले कार्यकर्ताओं का भी शाब्दिक सम्मान हुआ।

श्रीजी की माला का सौभाग्य

श्रीजी की माला की बोली का सौभाग्य मंत्री देवेंद्र, मयूख एवं देवेश कासलीवाल परिवार को प्राप्त हुआ।

मंगल आरती, परस्पर उत्तम क्षमा एवं महिला मंडल द्वारा मिश्री-खोपरा वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं से प्रस्तावित महामस्तकाभिषेक आयोजन के लिए अभी से तैयार होने और पुण्यार्जन करने का आह्वान किया।

श्रीफल साथी : पदम जैन बिलाला, जयपुर