जयपुर। जनकपुरी-ज्योतिनगर स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म की पूजन-विधान श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन के माध्यम से धर्म आराधना की।
शांतिधारा के साथ हुई धर्म आराधना
इस अवसर पर ज्ञानचंद-राजेश बस्सीवाला परिवार तथा पदम जैन बिलाला परिवार की ओर से मास्टर आदित बिलाला ने शांतिधारा का पुण्यार्जन किया। श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन कर श्रद्धा एवं भक्ति अर्पित की।
‘सत्य केवल वाणी तक सीमित नहीं’
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज ने कहा कि सत्य धर्म केवल वाणी से सत्य बोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म से सत्य का पालन करना ही सच्चा धर्म है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में ईमानदारी, सरलता और सदाचार अपनाना चाहिए तथा परिस्थितियां विपरीत होने पर भी असत्य का सहारा लेने से बचना चाहिए।
सत्य से आत्मशुद्धि की ओर बढ़ता है जीवन
आचार्य श्री ने कहा कि सत्य का मार्ग कठिन अवश्य हो सकता है, लेकिन यही मार्ग व्यक्ति को आत्मशुद्धि और मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ाता है। सत्य का आचरण व्यक्ति के विचार, वाणी और व्यवहार में एकरूपता लाता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को दशलक्षण महापर्व के दौरान धर्म के सिद्धांतों को केवल पूजन तक सीमित न रखते हुए जीवन और व्यवहार में उतारने की प्रेरणा दी।
प्रतिदिन हो रहे पूजन-विधान
दशलक्षण महापर्व के अवसर पर मंदिर में प्रतिदिन पूजन-विधान एवं विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन आयोजनों में सहभागिता कर धर्म आराधना कर रहे हैं।




