इंदौर। नेमी नगर जैन कॉलोनी में आचार्य श्री सुनील सागरजी महाराज के सान्निध्य में आयोजित इंद्रध्वज महामंडल विधान के छठवें दिन श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएँ बढ़-चढ़कर विधान में शामिल होकर भक्ति-भाव से प्रभु की आराधना कर रहे हैं। विधान के माध्यम से पूरा वातावरण धर्ममय बना हुआ है। आचार्य श्री ने अपने मंगल प्रवचन में आत्मवैभव के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि मनुष्य अक्सर बाहरी संपत्ति और संसार के वैभव को जुटाने में अपना जीवन व्यतीत कर देता है, लेकिन अपनी वास्तविक संपत्ति को पहचान नहीं पाता। उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में कहा, “तुम्हें निरखते-निरखते आज मुझे मेरी संपत्ति मिली है। आज मुझे पता पड़ा कि मेरी असली संपत्ति क्या है। दुनिया के तिनकों को इकट्ठा करते-करते जिंदगी बीत जाती है, लेकिन यह मालूम नहीं पड़ता कि मेरी असली संपत्ति मेरी आत्मा का वैभव है।
प्रकृति को प्राकृतिक ही रहने देना चाहिए
आचार्य श्री ने प्रेरणा देते हुए कहा कि मनुष्य को अपने समय और धन का सदुपयोग करना चाहिए। जीवन का थोड़ा-सा समय और संसाधन भी यदि सही दिशा में लगाए जाएँ, तो जीवन आनंदमय बन सकता है। उन्होंने प्रकृति के सहज स्वरूप को बनाए रखने का संदेश देते हुए कहा कि प्रकृति को प्राकृतिक ही रहने देना चाहिए, इसी में सबकी भलाई है। आचार्य श्री के इन प्रेरणादायी वचनों से श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, प्रभु भक्ति, संसाधनों के सदुपयोग और प्रकृति संरक्षण की प्रेरणा मिल रही है। इंद्रध्वज महामंडल विधान में श्रद्धालुओं की सहभागिता और भक्ति का उत्साह धर्ममय वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना रहा है।




