इंदौर। श्रावक संस्कार शिविर एवं पर्युषण महापर्व के नौवें दिन विद्यासुधा देशना मंडप, दलाल बाग में तीर्थ चक्रवर्ती मुनिश्री 108 सुधासागरजी महाराज ने उत्तम आकिंचन्य धर्म पर धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जीवन में ऊपर उठने के लिए व्यक्ति को अपने भीतर का भार कम करना होगा।
मुनिश्री ने सूत्र दिया—“छोड़ो और दौड़ो। जो जितना छोड़ देगा, उतना आगे बढ़ेगा और जो जितना जोड़ता जाएगा, उतना ही रुकता जाएगा।”
हल्का पलड़ा ही ऊपर उठता है
मुनिश्री ने तराजू का उदाहरण देते हुए कहा कि भारी पलड़ा नीचे जाता है और हल्का पलड़ा ऊपर उठता है। इसी प्रकार जीवन के दस धर्म व्यक्ति के भीतर के भार को क्रमशः कम करते हैं। मोह, लोभ, आसक्ति और परिग्रह का भार कम होने पर आत्मा ऊंचाइयों की ओर बढ़ती है।
पाप का कर्म-कर्ज और पुण्य
मुनिश्री ने कहा कि कई लोग धर्म, पूजा-पाठ और भक्ति करने के बाद भी जीवन में अपेक्षित परिवर्तन न देखकर निराश हो जाते हैं। उन्होंने व्यापारी के पुराने कर्ज का दृष्टांत देते हुए कहा कि जिस प्रकार पुराने कर्ज का ब्याज वर्तमान की कमाई को पहले समाप्त कर देता है, उसी प्रकार पूर्व में किए गए पापों का कर्म-कर्ज वर्तमान के पुण्यफल को भी प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में धर्म से निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि निरंतर धर्म-साधना और आत्मशुद्धि के प्रयास करते रहना चाहिए।
मूर्ति बनाई नहीं, प्रकट की जाती है
उत्तम आकिंचन्य धर्म को समझाते हुए मुनिश्री ने पाषाण की मूर्ति का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि मूर्तिकार पत्थर के भीतर मूर्ति नहीं बनाता, बल्कि मूर्ति के स्वरूप में बाधक पत्थर को हटाता जाता है। बाधक आवरण हटने पर मूर्ति स्वयं प्रकट हो जाती है।
इसी प्रकार आत्मा को नया बनाना नहीं है। उसके शुद्ध स्वरूप के प्रकट होने में बाधक मोह, आसक्ति, परिग्रह, क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे विकारों को हटाना है। यही आकिंचन्य धर्म की वास्तविक साधना है।
शरीर साधना का माध्यम है
मुनिश्री ने कहा कि साधक को यह भाव दृढ़ करना चाहिए कि “मैं शरीर नहीं हूं, मैं शरीर से भिन्न चेतन आत्मा हूं।” शरीर साधना का माध्यम है, आत्मा का स्वरूप नहीं। जितना व्यक्ति विकारों और ममता के भार को छोड़ता जाता है, उतना ही आत्मिक उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
धर्मसभा में रहे उपस्थित
धर्मसभा में पाद प्रक्षालन महामंत्री हर्ष जैन ने किया। इस अवसर पर चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन गोधा, सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद गोधा, चक्रवर्ती मनीष गोधा, अशोक डोशी, आलोक-आकाश कोल, प्रिंसिपल टोंग्या, हुकुमचंद जैन काका, संजय पाटोदी, अक्षय कासलीवाल, धर्मेंद्र सिनकेम, गिरीश ‘गिन्नी’, ब्रह्मचारी प्रदीप, ब्रह्मचारी पारस, विजय धुर्रा सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी समाजजन उपस्थित रहे।
श्रीफल साथी : राजेश जैन दद्दू, इंदौर





