इंदौर। दलाल बाग मैदान में आयोजित विशाल स्नातक सम्मेलन की सभा को संबोधित करते हुए निर्यापक श्रमण राष्ट्र संत मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने कहा कि जीवन में किसी के प्रति द्वेष अथवा निजी स्वार्थ का भाव नहीं रखना चाहिए। व्यक्ति जब निःस्वार्थ भाव से कार्य करता है और किसी का अहित नहीं सोचता, तो सफलता का मार्ग स्वयं प्रशस्त होता है।

योग्यता के साथ पुण्य का उदय भी जरूरी

मुनि श्री ने कहा कि संसार में योग्य व्यक्ति का सम्मान होता है, किंतु उचित अवसर मिलने के लिए योग्यता के साथ पुण्य और यश-कीर्ति कर्म का उदय भी आवश्यक है। व्यक्ति को अपने जीवन में इष्ट और अनिष्ट दोनों की पहचान करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जो बात हमारे लिए हानिकारक है, उसका ज्ञान होने पर भी यदि वह छूटती नहीं है तो आत्मचिंतन आवश्यक है। अनिष्ट को दूर करने का प्रयास करने पर जीवन में हितकारी मार्गों के लिए अवसर बनते हैं।

दया से दूसरे को मिले सुख

मुनि श्री ने दया धर्म का स्वरूप समझाते हुए कहा कि सच्ची करुणा वही है, जिससे सामने वाले को लाभ और सुख की अनुभूति हो। जीवों के प्रति करुणा, जागरूकता और अनुग्रह का भाव व्यक्ति के धर्माचरण को सार्थक बनाता है।

उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर केवल बाहरी व्यवहार पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति की भावना में दूसरों के हित और कल्याण का विचार होना चाहिए।

निःस्वार्थ सेवा और प्रभावना का संदेश

मुनि श्री ने कहा कि लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक है। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से मिली प्रेरणा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि निजी स्वार्थ नहीं रखना और किसी का अहित नहीं करना जीवन का महत्वपूर्ण सिद्धांत है।

उन्होंने दान की प्रेरणा देते हुए कहा कि दान का आदेश देने के बजाय उसके स्वरूप, महिमा और सही लक्षणों का विवेचन करना चाहिए, जिससे लोगों में स्वतः प्रेरणा जागृत हो।

युवा विद्वानों को मिला सम्मान

जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम में मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज का मार्गदर्शन हर आयु वर्ग को मिल रहा है। उन्होंने युवाओं के लिए लक्ष्य आधारित कार्ययोजना पर आगे काम करने की बात कही।

सम्मेलन में युवा विद्वानों को विद्वत श्री एवं विदुषी श्री की उपाधि से विभूषित किया गया। विभिन्न विषयों में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले विद्वानों को आईपीएस शांत कुमार, डीआईजी विनीत जैन, श्रमण संस्कृति संस्थान के प्रमोद पहाड़िया, उत्तम पाटनी, चक्रवर्ती सपना-मनीष गोधा, सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद नवीन गोधा, चातुर्मास अध्यक्ष अशोक जोशी एवं अन्य पदाधिकारियों ने सम्मानित किया।

पूरी न्यूज का सार 5 पॉइंट में

- मुनि सुधासागर जी महाराज ने द्वेष और निजी स्वार्थ छोड़ने की प्रेरणा दी।

- योग्यता के साथ पुण्य एवं यश-कीर्ति कर्म के उदय को महत्वपूर्ण बताया।

- दया धर्म को दूसरों के सुख और लाभ से जोड़ा।

- निःस्वार्थ सेवा एवं धर्मप्रभावना का संदेश दिया गया।

- युवा विद्वानों को विद्वत श्री और विदुषी श्री की उपाधि से सम्मानित किया गया।

श्रीफल साथी : राजीव सिंघई