इंदौर। दलाल बाग मैदान में चल रहे अखिल भारतीय श्रावक संस्कार शिविर की विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर महाराज ने कहा कि पापी अथवा अपराधी को सुधारना है तो उसके दुर्गुणों और पुराने पापों को मत देखो। उसे अच्छे लोगों की संगति और संतों का सान्निध्य मिलने दो, उसका जीवन स्वयं बदल जाएगा।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति के मन में अनेक बार गुरु, माता-पिता और भगवान के प्रति भी अशुभ विचार आ सकते हैं। ऐसे व्यक्ति के अतीत की परतें खोलने अथवा उसके पापों की गिनती करने के बजाय उसे सत्संगति देनी चाहिए। जब उसे सही वातावरण मिलेगा तो वह स्वयं अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें छोड़ने का प्रयास करेगा।

संस्कार शिविर से नशामुक्त समाज का संकल्प

मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि गुरुदेव के संदेश को अपने-अपने नगरों तक पहुंचाना है। बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, गुटखा और शराब जैसे नशे मानव समाज को नुकसान पहुंचा रहे हैं तथा अनेक परिवारों को बर्बाद कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सभी को अपने नगर की संस्थाओं के सहयोग से नशामुक्ति अभियान चलाना चाहिए। यदि किसी एक व्यक्ति का जीवन भी नशे से बच जाता है तो यह पुरुषार्थ सार्थक हो जाएगा।

सोलह हजार दीपों से जगमग होगी महाआरती

सामाजिक संसद के कार्याध्यक्ष नवीन गोधा ने बताया कि मुनिपुंगव सुधासागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में धूप दशमी का दिन ऐतिहासिक होगा। श्रावक संस्कार शिविर में सोलह हजार दीपों से महाआरती की जाएगी। इसके मुख्य पात्रों का चयन प्रधान प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया द्वारा किया जाएगा।

प्रदीप भैया ने बताया कि दशलक्षण महापर्व में प्रतिदिन गुरुदेव के श्रीमुख से जगत कल्याण की कामना हेतु महाशांति धारा हो रही है। इसका सौभाग्य श्रद्धालुओं को प्राप्त हो रहा है। महाशांति धारा का आज का सौभाग्य मुंबई निवासी सुमति प्रकाश जैन एवं कमल जैन को मिला।

मांगलिक क्रियाएं श्रद्धापूर्वक संपन्न

आचार्यश्री के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन सुमन धगड़ा, ब्यावर; विजय धुर्रा, अशोकनगर; नवीन गोधा, अशोक डोशी, रानी डोसी, आकाश कोयला एवं राहुल सेठी सहित अन्य भक्तों ने किया। पाद प्रक्षालन भी श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ।

बुरे समय में साथ और सेवा का महत्व

मुनिश्री ने कहा कि अच्छे दिनों में सभी साथी बनते हैं, लेकिन बुरे दिनों में साथ देने वाले कम होते हैं। उन्होंने तंबाकू और गुटखे के दुष्परिणामों का उदाहरण देते हुए कहा कि चेतावनी को समय रहते स्वीकार करना चाहिए। जब समय निकट और विकट हो जाता है, तब पश्चाताप का अवसर भी सीमित रह जाता है।

उन्होंने श्रमण संस्कृति में पुरुषार्थ को प्रधान बताते हुए कहा कि साधना और तपस्या से जीवन के लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं। अपने और अपने परिवार का पालन तो संसार में सभी करते हैं, परंतु असहायों की सहायता करना, गरीबों के लिए कुछ देना और दया धर्म में योगदान करना बहुत बड़ा धर्म है।

धर्मसभा में रहे उपस्थित

धर्मसभा में प्रधान प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया, ब्रह्मचारी विनोद भैया, चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन गोधा, सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद गोधा, चक्रवर्ती मनीष गोधा, महोत्सव अध्यक्ष अशोक डोशी, महामंत्री हर्ष जैन, मंत्री अक्षय कासलीवाल, धर्मेन्द्र सिमकेम, रमेशचंद्र निर्वाणा, शिविर पुण्यार्जक आकाश कोयला, सह-कोषाध्यक्ष सौरव बड़जात्या, प्रिंसिपल टोंग्या, संजय पाटोदी, हुकुम काका कोटा, विजय धुर्रा, संजय सामरिया, गिरीश गिन्नी, प्रचार प्रमुख संजय पाटौदी, सोनाली बागड़िया, अर्चना गोधा, राहुल सेठी, भूपेंद्र भोपाली, विपुल बाझल एवं राजेश दद्दू सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी समाजजन उपस्थित रहे।

पोस्टर सार:

सत्संगति से बदल सकता है हर जीवन।

मुनिपुंगव सुधासागर महाराज ने दिया नशामुक्त समाज और सेवा धर्म का संदेश।

दलाल बाग में होगी सोलह हजार दीपों से महाआरती।

श्रीफल साथी : राजीव सिंघई