इंदौर। दलाल बाग मैदान में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने कहा कि अच्छी वस्तु एवं अच्छे व्यक्ति में ही लोग दोष ढूंढते हैं। सफेद वस्त्र पर छोटा-सा दाग भी तुरंत दिखाई देता है, जबकि सामान्य वस्तुओं की कमियों पर प्रायः उतना ध्यान नहीं जाता।

उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अच्छा कार्य कर रहा है तो आलोचना और व्यंग्य से घबराने के बजाय उसे आत्मपरीक्षण तथा आगे बढ़ने का अवसर मानना चाहिए।

सफलता की कुंजी है आत्मदोष देखना

मुनि श्री ने कहा कि सफलता केवल प्रशंसा से नहीं मिलती, बल्कि अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें सुधारने की कला से मिलती है। व्यक्ति को दूसरों में दोष देखने से पहले अपने विचारों और आचरण का मूल्यांकन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सत्य को सामने आने देना चाहिए। दान, पूजा और प्रभावना से गृहस्थ जीवन में सेवा का विस्तार होता है, जबकि साधु-संत तप और साधना के माध्यम से धर्मप्रभावना करते हैं।

राम-रावण के उदाहरण से समझाया विरोध का महत्व

मुनि श्री ने कहा कि जीवन में विरोधी परिस्थितियां और भिन्न व्यक्तित्व भी हमें सही-गलत की पहचान कराते हैं। उन्होंने श्रीराम और रावण के उदाहरण के माध्यम से कहा कि विरोधाभास से गुणों का महत्व अधिक स्पष्ट होता है।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति को सफलता या असफलता, दोनों स्थितियों में चिंतनशील बने रहना चाहिए। केवल उपलब्धि पर अत्यधिक हर्षित होना भी विवेक को प्रभावित कर सकता है।

आनंद और हर्ष में बताया अंतर

मुनि पुंगव ने कहा कि आनंद और क्षणिक हर्ष अलग-अलग भाव हैं। गलत कार्य, असत्य या किसी की हानि पर प्रसन्न होना मन को अशांत करने वाला भाव है। मन में ईर्ष्या, द्वेष या असत्य का भाव आने पर व्यक्ति को तुरंत आत्मचिंतन करना चाहिए।

प्रवचन में मानसिक तनाव और निराशा जैसे संदर्भों का उल्लेख करते हुए मुनिश्री ने भावों को संयमित रखने का संदेश दिया। मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित परेशानी होने पर योग्य चिकित्सक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है।

17 से 19 अक्टूबर तक राष्ट्रीय स्नातक सम्मेलन

मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ एवं 18 पिच्छिकाओं के सान्निध्य में 17 से 19 अक्टूबर तक दलाल बाग मैदान में राष्ट्रीय स्नातक सम्मेलन आयोजित होगा।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1996 में श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर में 40 विद्यार्थियों से प्रारंभ हुई यह शैक्षणिक परंपरा आज देशभर में डेढ़ हजार से अधिक स्नातकों तक पहुंच चुकी है। सम्मेलन में देशभर से युवा विद्वान आएंगे और तत्त्वदर्शन पर गहन मंथन करेंगे।

धर्म प्रभावना समिति, इंदौर के नवीन आनंद गोधा, सपना-मनीष गोधा, अध्यक्ष अशोक-रानी दोशी, स्वागत अध्यक्ष संजय सामरिया, धर्मेंद्र सिमकेम, गिरीश जैन गिन्नी, समूह महामंत्री हर्ष जैन, मंत्री अक्षय कासलीवाल, कोषाध्यक्ष आकाश कोयला, सहकोषाध्यक्ष सौरभ बड़जात्या, संजय पाटौदी, राहुल स्पोर्ट्स सहित अन्य पदाधिकारियों ने समाजजनों से सम्मेलन में उपस्थित रहने का आग्रह किया।