इंदौर। इंदौर की धर्मप्राण नेमिनगर जैन कॉलोनी में चल रहे इंद्रपुरी चातुर्मास उत्सव में प्राकृताचार्य श्री सुनीलसागर जी के प्रवचनों का धर्म लाभ ले रहे श्रद्धालु और गुरु भक्त भाव विभोर हो रहे हैं। मंगलवार को आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ने मंगल देशना में कहा कि निज आत्मा को जानना ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान है। दुनिया में इससे बेहतर ज्ञान कुछ भी नहीं होता। आचार्यश्री कुंदकुद स्वामी ने भी समयसार में भी एकत्व का भाव को बताया है। उन्होंने कहा कि इस बात का निश्चय करना होगा कि एकत्व आत्मा ही ज्ञान का माध्यम है। आत्मा को ही समय कहते हैं। जो समय की कीमत जान लेता है वही समयसार को प्राप्त होता है। इस दुनिया में सुंदर कौन? दुनिया में मिस इंडिया, मिस्टर इंडिया, मिस्टर इंदौर आदि प्रतियोगिता होती है। आखिर में इनका परिणाम देखो। आज इनकी स्थिति क्या है।
तीर्थकर का आत्मा भी तो परमात्मा बना है
दुनिया में बाहर की दौड़ में शामिल नहीं होना चाहिए। दिखावे की दौड़ सही नहीं है। आचार्य श्री ने कहा कि इस दुनिया में सबसे सुंदर कौन है तो इसका जबाव है तो वह आत्मा ही सबसे सुंदर है। उन्होंने कहा कि देह में बैठी आत्मा को नहीं जाना तो कुछ नहीं जाना। उन्होंने कहा कि भोग सामग्री मौत का कारण भी बन सकती है। यह आत्मा ही परमात्मा बन सकता है। तीर्थकर का आत्मा भी तो परमात्मा बना है। आचार्य श्री ने विभक्त और अभक्त के अंतर को सूक्ष्मता से समझाया।
उत्तम पात्र का चयन करना चाहिए
आचार्य श्री सुनीलसागर जी ने कहा कि जीव बिना कपड़ों के आता है। बिना लफड़ों के आता है। यहां आकर अपना राजपाठ बनाता है। पर समय पर हिसाब नहीं करता तो जाने के बाद वह निंदा का पात्र बनता है। जब वह गया तो इतना कमाने के बाद भी खाली हाथ ही गया। जीरो से शुरूआत की थी और आखिर में जीरो पर ही अपना जीवन खत्म कर लिया। उन्होंने कहा कि पात्र और कुपात्र व्यक्ति की पहचान भी बताई। कमजोर पात्र की मदद भी करना चाहिए। बल्कि वह सच्चा पात्र होना चाहिए। उत्तम पात्र का चयन करना चाहिए। दान की परिभाषा अपना लाभ हो और दूसरों का भी भला हो।
यह रहे उपस्थित
इस अवसर पर इंद्रपुरी चातुर्मास उत्सव समिति के इंद्रकुमार जैन, नेमिनगर जैन कॉलोनी मंदिर समिति के अध्यक्ष कैलाश लुहाड़िया, देवेंद्र सेठी, प्रदीप पाटोदी, कुशलराज जैन पमपम सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहीं।



