मुरैना/गाजियाबाद। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, कविनगर में 25 एवं 26 अक्टूबर को द्विदिवसीय राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी संपन्न हुई। संगोष्ठी का विषय ‘गणाचार्य विरागसागर जी के साहित्यिक अवदान का अनुशीलन’ रहा। वाक्केसरी आचार्य श्री विनिश्चयसागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वानों ने जैन साहित्य, दर्शन, अध्यात्म और श्रमण परंपरा के विविध पक्षों पर विचार रखे।

संगोष्ठी का आयोजन वर्षायोग समिति 2026 द्वारा किया गया। कार्यक्रम के निदेशक डॉ. श्रेयांस कुमार जैन, बड़ौत तथा संयोजक डॉ. आशीष कुमार जैन, बम्होरी रहे।

शोधपत्रों में हुआ विविध कृतियों का अनुशीलन

दो दिनों तक चले विभिन्न सत्रों में जैन दर्शन, प्राकृत एवं संस्कृत साहित्य, आगमिक परंपरा, आध्यात्मिक साधना, श्रमणाचार और जैन इतिहास से जुड़े विषयों पर शोधपत्र वाचन हुआ। विद्वानों ने गणाचार्य विरागसागर जी से संबंधित अनेक साहित्यिक कृतियों की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए उनके दार्शनिक, आध्यात्मिक और सामाजिक पक्षों पर प्रकाश डाला।

प्रो. फूलचंद्र जैन प्रेमी ने ‘बारसाणुवेक्खा की सर्वोदयी टीका’, प्रो. अशोक कुमार जैन ने ‘रयणसार की रत्नत्रयवर्धिनी टीका’, डॉ. श्रेयांस सिंघई ने ‘लिंगपाहुड़ की श्रमणप्रबोधिनी टीका’, डॉ. अनिल जैन ने ‘शुद्धोपयोग’ तथा डॉ. श्रेयांस कुमार जैन ने सम्यग्दर्शन विषयक कृतियों पर विचार प्रस्तुत किए।

दर्शन, साधना और इतिहास पर केंद्रित रहे सत्र

डॉ. पंकज जैन ने ‘आगमचक्षु साहू’, डॉ. शैलेष जैन ने ‘सल्लेखना से समाधि’, डॉ. अल्पना जैन ने ‘परम दिगंबर जैन मुनि’, पं. पवन जैन ने ‘सर्वोदयी दिगंबर जैन धर्म’, डॉ. आशीष जैन ने ‘तीर्थंकर दर्शन’ तथा प्रो. जयकुमार जैन उपाध्ये ने ‘श्रमण आहारचर्या’ विषय पर विमर्श किया।

इसके अतिरिक्त सामायिक पाठ, जैन ज्योतिर्लोक, जल बिंदु महाकाव्य, यज्ञोपवीत विधि, समाधि तंत्र, मेरी भावना प्रवचन, पंचकल्याणक महोत्सव, सम्राट खारवेल शिलालेख, शुद्ध शाकाहार, तीर्थंकर वर्धमान, व्यसन विचार और भावों के विशुद्ध क्षण जैसे विषयों पर भी विद्वानों ने शोधपरक विचार रखे।

जैन वाङ्मय के संरक्षण पर दिया जोर

संगोष्ठी में प्राचीन जैन ग्रंथों की टीकाओं, आगमिक साहित्य, सम्यग्दर्शन, शुद्धोपयोग, सल्लेखना और श्रमणाचार के गहन अध्ययन की आवश्यकता पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि जैन वाङ्मय के संरक्षण, संवर्धन और शोधपरक लेखन को निरंतर प्रोत्साहन मिलना चाहिए।

आचार्यश्री का सान्निध्य रहा प्रेरक

आचार्य श्री विनिश्चयसागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में हुई तत्त्वचर्चा ने विद्वानों एवं श्रावकों को जैन सिद्धांतों के अध्ययन और आत्मचिंतन की प्रेरणा दी। समापन सत्र में संगोष्ठी का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया तथा सहभागी विद्वानों का सम्मान किया गया।

मंदिर समिति के अध्यक्ष सुभाष जी, महामंत्री प्रदीप जी, धर्मेंद्र जी, भूपेंद्र जी, निखिल जी एवं सकल दिगंबर जैन समाज ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया।

श्रीफल साथी : मनोज जैन नायक, मुरैना