देहरा/तिजारा। देहरा/तिजारा अतिशय क्षेत्र में चातुर्मासरत आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज के ससंघ सानिध्य में अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद का 9वां राष्ट्रीय अधिवेशन श्रद्धा एवं उत्साह के साथ आयोजित हुआ। मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन और प्रचार मंत्री उमंग जैन ने बताया कि अधिवेशन के अवसर पर देशभर से आए जैन ज्योतिषाचार्यों एवं परिषद के सदस्यों ने आचार्य श्री के चरणों में उपस्थित होकर भाव-विनयांजलि अर्पित की तथा ज्योतिष विद्या से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया। देहरा अतिशय क्षेत्र में चातुर्मास कर रहे आचार्य श्री विमर्शसागर जी के दर्शन एवं मंगल आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोग पहुंच रहे हैं।
अधिवेशन के कार्यों पर प्रकाश डाला
मंगलवार की प्रातः जैन ज्योतिषाचार्यों का वृहद् संगठन आचार्य श्री के सानिध्य में पहुंचा। समाज को मिथ्याभ्रम से निकालकर जिनेन्द्र भक्ति से जोड़ने के उद्देश्य से परिषद के संस्थापक एवं अध्यक्ष रवि जैन ‘गुरुजी’ ने अधिवेशन के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 2020 में ज्योतिषाचार्यों ने मिलकर परिषद का गठन किया था। परिषद का मुख्य उद्देश्य जैन समाज को मिथ्याभ्रम से निकालकर जिनेन्द्र भगवान की आराधना एवं धर्म से जोड़ना है। संगठन के माध्यम से इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं और काफी सफलता भी प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि आचार्य गुरुवर के सानिध्य में परिषद का 9वाँ अधिवेशन सम्पन्न होना सभी ज्योतिषाचार्यों के लिए गौरव का विषय है। गुरु आशीर्वाद से परिषद अपने उद्देश्यों को और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ाएगी।
ज्योतिष को भय का माध्यम नहीं, पुरुषार्थ का मार्ग बनाएं
आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने परिषद के सदस्यों को मार्गदर्शन देते हुए कहा कि प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव स्वामी ने अपने पुत्र चक्रवर्ती भरत आदि के लिए ज्योतिष, गणित आदि विद्याओं का ज्ञान प्रदान किया था। जैन ज्योतिष समय ज्ञान का एक अंग है, जिसका उद्देश्य व्यक्ति को सही दिशा में पुरुषार्थ के लिए प्रेरित करना होना चाहिए। आचार्य श्री ने कहा कि ज्योतिष के माध्यम से किसी व्यक्ति को भयभीत करने के बजाय उसके अंदर संभलने की भावना और आत्मविश्वास जागृत करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति अपनी दुविधा लेकर आए तो उसे ग्रहों की दशा बताकर डराने के स्थान पर वर्तमान में जिनेन्द्र भक्ति से जुड़ने और अपना पुरुषार्थ श्रेष्ठ बनाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
सम्यक पुरुषार्थ की भावना को बढ़ाने का संकल्प लिया
आचार्यश्री ने जैन ज्योतिषाचार्यों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जैन ज्योतिष को विश्व पटल पर पहुंचाने का प्रयास सराहनीय है। भाग्य के भरोसे बैठने के बजाय सम्यक पुरुषार्थ करते हुए धर्म और जिनेंद्र भक्ति से जुड़ना ही जीवन को सार्थक दिशा प्रदान करता है। इस अवसर पर मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, महामंत्री नरेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष शिंभू जैन, प्रचार मंत्री उमंग जैन, चातुर्मास अध्यक्ष सुरेश जैन, रवि जैन, सोनू जैन, पूर्व अध्यक्ष नरेन्द्र जैन, अनिल जैन, राकेश जैन सहित परिषद, मंदिर समिति से जुड़े पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे। आचार्य श्री के मंगल आशीर्वाद से संपन्न अधिवेशन में जैन ज्योतिष के माध्यम से समाज में धर्म, आस्था, सकारात्मक सोच एवं सम्यक पुरुषार्थ की भावना को बढ़ाने का संकल्प लिया गया।









