धरियावद। आचार्य कल्प पुण्यसागरजी महाराज के 62वें अवतरण दिवस के त्रिदिवसीय महोत्सव के तीसरे दिन गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और विनय का विशेष वातावरण रहा। प्रातः भगवान के अभिषेक एवं पूजन के बाद संघस्थ मुनिराजों एवं आर्यिका माताजी ने गुरुदेव के चरणों में विनयांजलि अर्पित की।

श्रद्धालुओं ने अर्पित किए श्रीफल

विभिन्न प्रांतों तथा धरियावद के आसपास के गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने गुरुदेव को श्रीफल अर्पित कर अपनी श्रद्धा एवं समर्पण व्यक्त किया। अखिल भारतीय मेवाड़-वागड़ दशा नरसिंहपुरा समाज के 38 गांवों के अध्यक्ष लक्ष्मीलाल बोहरा भी पदाधिकारियों के साथ कार्यक्रम में पहुंचे और गुरुदेव के चरणों में विनयांजलि अर्पित की।

चातुर्मास समिति अध्यक्ष सागरमल बोहरा, समाज अध्यक्ष अरविंद पचौरी, महामंत्री सूर्यप्रकाश बोहरा एवं विनोद पटवा ने भी गुरुदेव को विनयांजलि प्रस्तुत की।

अष्टद्रव्य पूजन एवं पाद प्रक्षालन

श्रावक-श्राविकाओं ने भक्तिभाव से गुरुदेव का अष्टद्रव्य से पूजन किया। श्रद्धालुओं द्वारा पाद प्रक्षालन, जिनवाणी भेंट तथा नई पिच्छी एवं नया कमंडल समर्पण की धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं।

असम, गुवाहाटी, पश्चिम बंगाल तथा उदयपुर, भींडर, पारसोला, निठाऊवा, मुंगाणा, खुंता, लोहारिया, लसाड़िया एवं कुण सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किए।

62 जोड़ों ने की परिक्रमा

कार्यक्रम में 62 जोड़ों ने कलश एवं चंवर धारण कर गुरुदेव की तीन परिक्रमाएं लगाईं। भक्ति और श्रद्धा से ओतप्रोत इस दृश्य ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

शाम को नाटिका एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम

सायंकालीन सभा में पुनः विनयांजलि अर्पित की जाएगी। युवाओं द्वारा आचार्य कल्प पुण्यसागरजी महाराज के जीवन एवं व्यक्तित्व पर आधारित प्रेरक नाटिका ‘हंसमुख कैसे बने आचार्य कल्पपुण्यसागर’ प्रस्तुत की जाएगी। इसके साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।समस्त कार्यक्रम बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी बिगुल के निर्देशन में संपन्न हो रहे हैं।

श्रीफल साथी : अशोक कुमार जेतावत